देश
परमार्थ ज्ञान मंदिर में होगा हरिद्वार अधिवेशन : स्थानीय संयोजक
विदेश से जुटेंगे साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार, समाजसेवी एवं विषय विशेषज्ञ
हरिद्वार ;- कला, साहित्य और संस्कृति के संवर्धन, संरक्षण एवं विकास के प्रति समर्पित थावे विद्यापीठ के तत्वाधान में आगामी 24 और 25 अक्टूबर, 2026 को प्रसिद्ध पावन तीर्थ स्थल हरिद्वार में स्थित परमार्थ ज्ञान मंदिर के विशाल और भव्य सभागार में दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का आयोजन होना निश्चित हुआ है, जिसमें देश – विदेश से साहित्यकार, शिक्षाविद, कलाकार, पत्रकार, संस्कृति के लिए समर्पित विद्वतजन एवं समाजसेवी और राष्ट्रप्रेमी जन भाग लेंगे।एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर हरिद्वार अधिवेशन के स्थानीय संयोजक एवं विद्यापीठ के उपकुलसचिव डॉ. गिरधारी लाल अग्रवाल ने यह जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि विदेशी प्रतिभागियों के साथ देश के आधा दर्जन राज्यों के लगभग 50 शहरों से प्रतिभागीगण सम्मिलित होकर अधिवेशन की शोभा बढ़ाएंगे। अधिवेशन के प्रथम दिवस निबंधन के पश्चात भव्य उद्घाटन समारोह और तीन तकनीकी सत्रों का संचालन होगा। तकनीकी सत्र हिंदी भाषा, पर्यावरण और युवा वर्ग के विषयों पर केंद्रित होगा। तत्पश्चात रात्रि में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा। वहीं दूसरे दिन सुबह में गायन वादन के साथ प्रभात फेरी निकाली जाएगी। एक तकनीकी सत्र के पश्चात मुक्त सत्र में विभिन्न क्षेत्र के राष्ट्रीय और सामाजिक हित में कार्य कर रहे चयनित प्रतिभागियों को गरिमामय सभागार में सम्मानोपाधियां प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात रात्रि में कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होना सुनिश्चित किया गया है। इस अधिवेशन को सफल बनाने के लिए विद्यापीठ के पदाधिकारी एवं सदस्य गण तैयारी में जुटे हुए हैं। अतिथियों के आवासन, भोजन के साथ अधिवेशन हेतु सभागार आदि के अवलोकन करने के लिए थावे विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. पी. एस. दयाल यति प्रो.(डॉ.) राम प्रकाश शर्मा एवं रंजीत कुमार के साथ हरिद्वार की यात्रा पर हैं। इस अधिवेशन में विद्यापीठ के कुलाधिपति महामंडलेश्वर (डॉ.) स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक, प्रतिकुलपति डॉ. जे. बी. पांडेय के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में कुलसचिव डॉ. पी. एस. दयाल यति और उप कुलसचिव डॉ. गिरधारी लाल अग्रवाल, अधिवेशन संयोजक डॉ. गजेन्द्र तिवारी सहित सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण कार्यरत हैं।स्थानीय संयोजक एवं उप कुलसचिव डॉ. अग्रवाल ने बताया कि विद्यापीठ द्वारा ऐसे अधिवेशनों का आयोजन विद्यापीठ के स्थापना काल से ही किसी साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व के क्षेत्र, तीर्थ स्थान में ही किए जाने की परंपरा है। इसी श्रृंखला में चित्रकूट, अयोध्या, वाराणसी, जगन्नाथ पुरी में अधिवेशन करने के पश्चात इस बार विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गंगा अवतरण स्थल “हरिद्वार”, जिसे हरिधाम के द्वार के रूप में देखा जाता है, में होना सुनिश्चित किया गया है। धार्मिक महत्व के ऐसे दिव्य क्षेत्र में कार्यक्रम करने से स्वाभाविक रूप से व्यक्ति का मन शुद्ध और पवित्र होकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का अनुभव करने लगता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस संस्था की सांस्कृतिक विरासत जितनी अधिक समृद्ध होती है, वह उतनी ही श्रेष्ठता के साथ समाज और देश की सेवा करने में सक्षम और सामर्थ्यवान होता है। ऐसे ही पावन विचारों के साथ थावे विद्यापीठ परमार्थ पथ पर अग्रसर है। ऐसे धार्मिक वातावरण और भगवती भगीरथी गंगा के तट पर थावे विद्यापीठ द्वारा वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया जाना, निश्चित रूप से विद्यापीठ के राष्ट्रीय कला,साहित्य एवं सांस्कृतिक प्रेम और निष्ठा को दर्शाता है।स्थानीय संयोजक डॉ. अग्रवाल ने यह भी बताया कि अधिवेशन में भाग लेने वाले पंजीकृत व चयनित सभी प्रतिभागियों के आवासन एवं भोजन आदि की व्यवस्था विद्यापीठ के द्वारा की जाएगी। दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने वाले प्रतिभागियों के लिए ड्रेस कोड होगा। पुरुषों के लिए सफेद कुर्ता, पजामा एवं केसरिया बंडी और लोंगो वाली पगड़ी, जबकि महिलाओं के लिए केसरिया बॉर्डर की सफेद साड़ी एवं लोंगो वाली पगड़ी की व्यवस्था प्रतिभागियों को स्वयं करनी होगी। विद्यापीठ के द्वारा पगड़ी, लोंगो, स्कार्फ, बैच और पट्टा उपलब्ध कराया जाएगा।

Business
सोने के कारोबार पर बढ़ता शिकंजा, स्वर्णकारों का दिल्ली में हुंकार ; रुपेश कुमार राष्ट्रीय सचिव,अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ 3545
- रेडिसन ब्लू में देशभर के दिग्गज स्वर्णकारों की बैठक, सरकार की नीतियों पर फूटा आक्रोश, जंतर-मंतर पर 5 से 10 हजार कारोबारियों के जुटने की तैयारी, पहले सरकार से सीधी वार्ता का फैसला, बैंकिंग नीतियों, कारोबार संबंधी व्यवस्थाओं और स्वर्णकारों की सुरक्षा का मुद्दा बना आंदोलन का केंद्र
लोकतंत्र न्यूज,नेशनल डेस्क,नई दिल्ली ;- सोने का कारोबार करने वाले व्यापारियों और कारीगरों की समस्याओं को लेकर अब अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ 3545 ने दिल्ली से बड़ी आवाज उठाने का संकेत दिया है।द्वारका स्थित रेडिसन ब्लू होटल में राष्ट्रीय अध्यक्ष कश्मीर सिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुई विशेष बैठक में देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे पदाधिकारियों ने सरकारी व्यवस्थाओं,बैंकिंग नीतियों और स्वर्ण कारोबार से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चिंता जताई।बैठक में वक्ताओं का कहना था कि हर दिन नई व्यवस्था, नए नियम और कारोबार से जुड़ी नई चुनौतियां स्वर्ण व्यवसायियों और कारीगरों के सामने परेशानी खड़ी कर रही हैं। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि कारोबारियों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो संघ को दिल्ली में बड़ा आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा।अब जंतर-मंतर की बारी!कर्नाटक के राम मूर्ति, पंजाब के मनदीप सिंह और राजस्थान के शिवकरण समेत अन्य प्रतिनिधियों ने दिल्ली में सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन का प्रस्ताव रखा। बैठक में सुझाव आया कि जंतर-मंतर पर 5,000 से 10,000 स्वर्ण व्यवसायियों को जुटाकर एक दिन का बड़ा प्रदर्शन किया जाए।प्रस्तावित आंदोलन में पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने तथा देश के अन्य राज्यों से भी प्रतिनिधियों को बुलाने पर जोर दिया गया।आंदोलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष कश्मीर सिंह राजपूत से कराने का सुझाव भी रखा गया।आंदोलन से पहले सरकार के दरवाजे पर दस्तकहालांकि बैठक में सीधे टकराव के बजाय पहले सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने पर भी जोर दिया गया। वाराणसी से पहुंचे शैलेश वर्मा ने सुझाव दिया कि संघ का प्रतिनिधिमंडल सरकार से सीधे वार्ता करे और स्वर्ण व्यवसायियों तथा कारीगरों की समस्याएं मजबूती से रखे।दिल्ली के अजीत विश्वास ने भी कहा कि सरकार और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर मांगों को सामने रखा जाना चाहिए। यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर धरना सरकार का ध्यान आकर्षित करने का माध्यम बनेगा।बैंकों की नीतियों पर भी सवालबैठक में बैंकों द्वारा अपनाई जा रही नीतियों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वर्ण कारोबार पहले ही अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतें व्यापारियों की परेशानी बढ़ा रही हैं।बैठक में मोदी सरकार द्वारा स्वर्ण व्यवसायियों के कारोबार को लेकर बार-बार किए जाने वाले कथित कारोबार-विरोधी प्रचार पर भी चिंता व्यक्त की गई और कहा गया कि सरकार को स्वर्ण कारोबार की वास्तविक परिस्थितियों और उससे जुड़े लाखों व्यापारियों व कारीगरों की समस्याओं को समझना चाहिए।लूट-डकैती ने बढ़ाई चिंताराष्ट्रीय अतिरिक्त महासचिव विभाष मैती और बिहार के सत्यम भारती ने स्वर्णकारों के साथ होने वाली घटनाओं तथा देशभर में लूट, डकैती और मारपीट की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए तथा स्वर्ण व्यवसायियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की।पंजाब-हरियाणा ने संभाली कमानपंजाब अध्यक्ष अश्विनी नमेशाह ने प्रस्तावित आंदोलन में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। हरियाणा अध्यक्ष पवन वर्मा ने अधिक से अधिक कारोबारियों को दिल्ली लाने तथा प्रदर्शन में आने वालों के रहने और भोजन की व्यवस्था में सहयोग की जिम्मेदारी लेने की बात कही।झारखंड से पहुंचे डॉ. दिलीप और अध्यक्ष वीरेंद्र, दिल्ली के अजीत विश्वास सहित अन्य पदाधिकारियों ने सरकार के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर स्वर्णकारों की समस्याएं रखने की जिम्मेदारी संभालने की बात कही।राष्ट्रीय सचिव अजीत विश्वास, अशोक सूरी, सरदार लखबीर सिंह और आंध्र प्रदेश के वेनेगिला महेश समेत अन्य पदाधिकारियों ने प्रस्तावित दिल्ली आंदोलन को व्यवस्थित और व्यापक बनाने की जिम्मेदारी ली। दक्षिण भारत से भी बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की भागीदारी का भरोसा जताया गया।
5 बड़े सवाल – 1. क्या स्वर्ण व्यवसाय से जुड़े लगातार बदलते नियम कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं?
2. बैंकिंग नीतियों को लेकर व्यापारियों की शिकायतों पर सरकार क्या कदम उठाएगी ?
3. मोदी जी बार-बार कह रहें हैं सोना नहीं ख़रीदे , मोदी सरकार को समझना चाहिए, सोने के व्यापार के साथ ही आपना जीवन जी रहे करोड़ों स्वर्ण कारीगरों और उनके परिवार के बारे क्या सोचते हैं, स्वर्णकारों और कारीगरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था कब बनेगी?
4. स्वर्ण व्यवसायी के साथ हर रोज देश के हर हिस्से में लूटपाट डकैती कत्ल हो रहे कोई जुम्मेदारी नहीं लेता ,सरकार संघ के प्रतिनिधिमंडल से सीधी वार्ता करेगी?
5. बातचीत विफल हुई तो क्या जंतर-मंतर पर हजारों स्वर्ण व्यवसायी उतरेंगे?एग्जिबिशन में दिखी देश की आभूषण ताकतबैठक के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष कश्मीर सिंह राजपूत सहित राष्ट्रीय पदाधिकारियों और सदस्यों ने दिल्ली में यशोभूमि और प्रगति मैदान में आयोजित सोने-चांदी की प्रदर्शनियों का दौरा किया। देशभर से पहुंचे स्वर्ण व्यवसायियों ने आभूषणों के नए डिजाइन और उत्पाद प्रदर्शित किए।बैठक ने साफ कर दिया कि स्वर्णकार संघ अब अपनी समस्याओं को बंद कमरों तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। पहले सरकार से बातचीत होगी, लेकिन समाधान नहीं निकला तो दिल्ली का जंतर-मंतर स्वर्ण कारोबारियों की आवाज का बड़ा मंच बन सकता है।

देश
11 वें आयुर्वेद दिवस महोत्सव पर दयानन्द आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय से निकाली गई आयुर्वेद जागरूकता रैली,आयुर्वेद अपनाने का किया गया आह्वान
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ;- 11 वें आयुर्वेद दिवस महोत्सव के अवसर पर सोमवार को दयानन्द आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल,सिवान तथा विश्व आयुर्वेद परिषद बिहार के संयुक्त तत्वावधान में प्राचार्य डॉक्टर सुधांशु शेखर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में दयानन्द आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय,सिवान से जेपी चौक तक आयुर्वेद जागरूकता रैली निकाली गई।प्राचार्य डॉक्टर सुधांशु शेखर त्रिपाठी ने लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।रैली के दौरान बैनर एवं स्लोगन के माध्यम से स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद चिकत्सा पद्धति को अपनाने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर उप प्राचार्य डॉक्टर राजा प्रसाद,डॉक्टर उपेंद्र पर्वत,डॉक्टर प्रकाश सिंह सहित दर्जनों छात्र एवं छात्राएँ शामिल रहे।

देश
शिक्षक समाज का मार्गदर्शक, गुरु का स्थान सर्वोच्च : रामाशीष सिंह
रमेंद्र राय ने शिक्षकों को किया सम्मानित, शिक्षक ही करे शिक्षक समाज का प्रतिनिधित्व : रामाशीष सिंह
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ; बैकुंठ शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, अमलोरी में सोमवार को शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।जहां विद्या भारती के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री रमेंद्र राय ने सीवान और गोपालगंज जिले से आये करीब 400 शिक्षक एवं शिक्षाविद् को सम्मानित किया। कार्यक्रम में शिक्षकों के योगदान, गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षा के महत्व पर चर्चा की गई।समारोह के मुख्य अतिथि काशी से आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रखर वक्ता रामाशीष सिंह रहे। उन्होंने शिक्षक, आचार्य और गुरु के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षक पाठ्यक्रम और विषय का ज्ञान देता है, जबकि गुरु शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है।रामाशीष सिंह ने कहा कि शिक्षक समाज का प्रतिनिधित्व भी शिक्षक को ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं, अपेक्षाओं और चुनौतियों को वही व्यक्ति बेहतर ढंग से समझ सकता है, जो स्वयं शिक्षा और शिक्षक समाज से जुड़ा रहा हो।उन्होंने विद्या भारती के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री रमेंद्र राय के शिक्षण एवं शिक्षक हित से जुड़े कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि रमेंद्र राय करीब 40 वर्षों से शिक्षा और शिक्षकों के लिए काम करते आ रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों से जुड़े विषयों को समझने और उनके प्रतिनिधित्व की भूमिका में शिक्षकों के बीच से आने वाले व्यक्ति का महत्व है।इस अवसर पर रमेंद्र राय ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्य-पुस्तकों का ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देने वाले मार्गदर्शक हैं। उनके संस्कार, अनुशासन और मार्गदर्शन का प्रभाव विद्यार्थी के पूरे जीवन पर रहता है। उनके हितों की अनदेखी होती है। इसलिए शिक्षकों के हक और अधिकार की लड़ाई के लिए वे चुनाव लड़ रहे हैं। कार्यक्रम में संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गजानन पाण्डेय, डॉ. अशोक पाण्डेय सहित कई विद्वान प्रोफेसर, शिक्षक एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे।
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सिवान1 week agoराष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का हुआ समापन, आयुर्वेद हमारी पारम्परिक धरोहर -डीएम
