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भिक्षु बन के प्रसन्न रहना संतों से सीखें – राजन जी महाराज
लोकतंत्र न्यूज नेटवर्क,सिवान ;- नगर के वीएम उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज परिसर में श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से चल रहे नौ दिवसीय संगीतम श्रीराम कथा के सातवें शनिवार को राजन जी द्वारा केवट प्रसंग सुन श्रद्धालु भावाभिभूत हो गए।अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी महाराज ने म धुर स्वरलहरियों के बीच “करूणानिधान रउआ जगत के दाता हई” भजन पर उपस्थित श्रद्धालु भावाभिभूत हो गए और जम के थिरके।पर्यावरण बोध के संदेश के प्रसार के क्रम में माँ गंगा की महिमा का गुणगान भी राजन जी ने किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के कार्य में हमेशा सहयोग करना चाहिए बाधा उत्पन्न करने पर कलंक लगता है। सब कुछ होता तो प्रभु श्रीराम की कृपा से ही है।शनिवार को श्रीराम कथा का प्रारंभ यजमानगण मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद, धर्मशिला देवी, सह यजमान रूपेश कुमार, नेहा गुप्ता आदि दैनिक यजमान इंजीनियर अशोक कुमार पांडेय, अनीता पाण्डेय, राजीव चौबे , पुष्पा चौबे, वैभव कुमार, प्रीति चौरसिया, कन्हैया आदि द्वारा श्रीराम चरित मानस की आरती के साथ कथा प्रारंभ हुई। भगवान श्रीराम के मिथिला से विवाह के उपरांत अयोध्या पहुंचने के प्रसंग पर कथा प्रारंभ हुई। राजन जी ने कहा कि जीवन के किसी भी परिस्थिति में यदि मनुष्य आनंद में रहना चाहता है तो अयोध्याकांड के प्रथम आठ चौपाई का पाठ नियमित तौर पर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में आनंद बना रहे इसके लिए केवल धन का होना आवश्यक नहीं है। अभाव में भी संतुष्ट रहना चाहिए। संतोष ही सबसे बड़ा सुख है। राम का नाम लेते रहिए और अपना कर्म करते रहिए। प्रभु श्रीराम की कृपा अवश्य प्राप्त होगी। दुनिया के लोग दौलत पकड़ के मुस्कुराते अवश्य हैं लेकिन भिक्षु बन के खुश रहना तो संतों से सीखना चाहिए। उन्होंने बताया कि भिक्षु और भिखारी में अंतर होता है। अयोध्या में दशरथ जी भगवान श्री राम का राज्याभिषेक करने की व्यवस्था बनाते हैं लेकिन मंथरा की मति बदलते ही उसके सलाह पर माता कैकेई श्रीराम के वन जाने जाने और भरत के राज्याभिषेक का वरदान मान लेती हैं। इसमें माता कैकई का कोई दोष नहीं था अपितु यह तो प्रभु की इच्छा ही थी।राजन जी ने कहा कि जो मनुष्य राम विमुख हो जाता है उसकी मति कभी भी बदल जाती है। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने पर उसमें क्रेडिट लेने वाले बहुत लोग मिल जाते हैं लेकिन असफलता मिलने पर लोग पास भी नहीं आते। इसलिए दुनिया के बजाय अपने कर्म पर सदैव ध्यान देना चाहिए। आपका स्नेही वहीं है जो आपकी असफलता पर भी आपसे प्रेम जताता है।राजन जी ने कहा कि भगवान श्रीराम वन के लिए माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ निकले। राजा दशरथ ने सुमंत को भेजा कि रथ लेकर जाएं।वन में निकलने पर मित्र निषादराज से मुलाकात होती है। उन्होंने कहा कि मित्र, स्वामी, गुरु, बहन के यहां कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। अपने सामर्थ्य के अनुरूप कुछ न कुछ उपहार लेकर जाना चाहिए। राजन जी ने कहा कि गंगा पार करने के क्रम में अपने महान भक्त केवट से भगवान श्रीराम की मुलाकात होती है। केवट गुहार लगाते हैं कि पाव धुलवा के थोड़ी नजर कीजिए आइए बैठिए फिर सफर कीजिए।

केवट के विनय पर भगवान पहले तो मौन रहते हैं। फिर केवट की निर्मल भक्ति से प्रसन्न हो भगवान उसे पांव पखारने की अनुमति देते हैं। केवट प्रसंग को सुन उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।शनिवार को श्रीराम कथा के दौरान महराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विद्या भारती के प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह,सिवान विभाग निरीक्षक श्री अनिल कुमार राम, श्री राजेश रंजन, श्री कृष्ण कुमार प्रसाद, श्री ललित राय, प्रधानाचार्य डॉक्टर कुमार विजय रंजन,श्री कमलेश नारायण सिंह, भाजपा नेता मुकेश कुमार बंटी, वी एम एच ई के प्रधानाचार्य राकेश कुमार सिंह, शिक्षाविद् पुष्पेंद्र पाठक बतौर अतिथि मौजूद रहे। आगत अतिथियों का स्वागत श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार, कोषाध्यक्ष प्रेमशंकर सिंह, सदस्य दीपक कुमार सिंह ने किया।


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प्रसन्नता से किया जाने वाला कार्य सदैव सफल होता है – राजन जी महाराज
लोकतंत्र न्यूज नेटवर्क,सिवान ; – श्रीराम कथा के पंचम दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी ने मिथिला के धनुष यज्ञ के प्रसंग का किया वर्णनसीवान। नगर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में राजन जी महाराज के श्रीमुख से हो रही श्रीराम कथा के पंचम दिन प्रारंभ में ताड़का वेद विद्यालय और रेणुआ स्थित श्री वैष्णव प्रताप सिंह वैदिक गुरुकुल के बटुकों के मंत्रोच्चार को सुन राजन जी महाराज मंत्रमुग्ध हो गए। श्रीराम कथा वाचन के दौरान गुरुवार को उन्होंने अहल्या उद्धार, विश्वामित्र मुनि संग श्रीराम और लक्ष्मण का मिथिला प्रवास, धनुष यज्ञ आदि प्रसंगों का वर्णन किया। श्रीराम कथा वाचन के दौरान राजन जी ने कहा कि भगवान तो सिर्फ भाव के भूखे होते हैं। उन्हें न तो धन लुभाता है और न वैभव। जटायु के प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। परहित से आशय उस व्यक्ति के हित से होता है जिसको न आप जानते हो न वो आपको जानता हो । परहित करने का भाव भी जागृत होने लगे तो फिर संसार में कुछ दुर्लभ नहीं होता। दूसरे का हित ही जीवन को सार्थक बनाता है।उन्होंने कहा कि भगवान राम जब किशोरावस्था में मुनि विश्वामित्र के साथ पिता दशरथ की आज्ञा पर घर से निकले तो उनके चेहरे पर एक सुंदर मुस्कान थी। राजन जी ने कहा कि कोई भी काम प्रसन्न होकर किया जाता है तो उसके पूर्ण होने की संभावना ज्यादा होती है। कार्य बताता है कि किस भाव से किया गया है? स्वभाव के भाव का अभाव होगा तो स्वरूप बिगड़ जाएगा।जीवन में पुण्य बढ़ाने के लिए प्रयास होने चाहिए। जहां सतयुग में सत्य, तत्व, दया , दान महत्वपूर्ण थे वहीं द्वापर युग में दया और दान। कलियुग में दान को सर्वश्रेष्ठ उपाय बताया गया है। कलयुग में निश्चित तौर पर अर्थ की प्रधानता है परंतु पुण्य अर्जित करने के लिए एक रूपये की आवश्यकता नहीं है। श्रीराम कथा सुनने, सेवा भावना, माता पिता और गौ माता की सेवा आदि से पुण्य अर्जित किया जा सकता है।ऋषि विश्वामित्र के साथ जाते भगवान श्रीराम गौतम ऋषि के आश्रम से गुजरते हैं। वहां उनके चरण रज से अहल्या का उद्धार होता है। इस प्रसंग में राजन जी ने कहा कि जीवन में किसी के दोष की चर्चा नहीं करनी चाहिए। मुनि विश्वमित्र ने भगवान को अहल्या के बारे मेंं बताया। जब संत कृपा करते हैं तो भगवान भी कृपा कर ही देते हैं। राजन जी ने कहा कि केवल भगवान ही हैं जो बिना किसी कारण के प्रेम करते हैं। भगवान भक्तों से किसी चीज की अपेक्षा नहीं रखते हैं वो तो बस भाव के भूखे होते हैं। इसलिए चाहे आप जितने भी जंजाल में हो भगवान का स्मरण करें, भजन के लिए समय निकालें। जैसे भोजन के लिए समय निकल ही जाता है वैसे ही भजन के लिए समय निकाले, अदभुत आनंद की अनुभूति होगी।राजन जी ने मुनि विश्वमित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के मिथिला पहुंचने और धनुष यज्ञ में भाग लेने का मनोहारी चित्रण किया। मिथिला के बाग में श्रीराम सीता के प्रथम बार एक दूसरे को देखने के प्रसंग पर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। सीता जी द्वारा माता गौरी जी के पूजन के प्रसंग में जब “गिरिवर राज के किशोरी हे मैया, पैया तोड़ी पड़ूं” गाया तो कथा पांडाल में श्रद्धालु थिरक पड़े। राजन जी ने कहा कि भगवान की पूजा मनोकामना पूरी होने के बाद बंद नहीं करना चाहिए अपितु उसके बाद पूजन और बढ़ा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु 108 एकादशी का व्रत अपने जीवन में कर लेता है उसका संपूर्ण जीवन मंगलमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रशंसा करना भी एक स्वभाव है,जिसे जीवन में समाहित करना चाहिए। गुरुवार को कथा श्रवण के लिए नगर उपसभापति किरण गुप्ता, रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स क्लब के संचालक संजय पाठक सहित कई न्यायाधीशगण, प्रशासनिक अधिकारी, अन्य गणमान्य कथा स्थल पर पहुंचे जिनका स्वागत श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार, संरक्षक डॉक्टर रामेश्वर कुमार, डॉक्टर राम इकबाल गुप्ता द्वारा किया गया। श्रद्धा भाव से परिपूर्ण कई अतिथि भूमि पर बैठकर कथा श्रवण के आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। गुरुवार को यजमान के रूप में जिला बीस सूत्री के उपाध्यक्ष संजय पांडेय, रंजना पांडेय, लायंस क्लब के अध्यक्ष विकास सोमानी, नेहा सोमानी, राजेश गुप्ता, अनुराधा गुप्ता, डॉक्टर नवल किशोर पांडे, संगीता पांडेय आदि रहे। गुरुवार को कथा पांडाल खचाखच भरा हुआ था। कुछ बाल स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सेवा करते देखे गए। मंच संचालन राजेश पांडेय और अंजनी पांडेय ने किया। पौराणिक महत्व वाली पंगनूर गाय को देखने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था।


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मन निर्मल हो जायेगा तो सर्वत्र दिख जायेंगे भगवान – राजन जी
लोकतंत्र न्यूज नेटवर्क,सिवान ;- पूज्य राजन जी महाराज ने भय प्रकट कृपाला दीन दयाला गाया तो उपस्थित श्रद्धालु भावाभिभूत हो गए।भगवान श्री राम के जन्म प्रसंग पर श्रद्धालुगण आस्था के उल्लास में श्रद्धा से सराबोर होकर थिरक उठे।
पूरे कथा पांडाल में हर उम्र के लोग भगवान श्रीराम के जन्म पर खूब खुशियां लुटाई। चॉकलेट, खिलौने, मिठाइयों की बरसात के बीच आस्था के भाव ने श्रद्धा के समंदर में खूब डुबकी लगाई। बच्चे बुजुर्ग बालिकाएं और महिलाएं सहित सभी रामरस से जमकर भीगे।मंगलवार को श्रीराम कथा के तीसरे दिन यजमानगण द्वारा श्रीरामचरित मानस ग्रंथ की आरती के साथ कथा की शुरुआत हुई। कथा का प्रारंभ ” तेरी मर्जी का मैं हूं गुलाम ओ मेरे अलबेले राम” भजन से हुई। इस भजन पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर आस्था के समंदर में गोते लगाने लगे। श्रीराम कथा वाचन के दौरान पूज्य राजन जी ने कहा कि भगवान हमारे आस पास ही विद्यमान हैं लेकिन वे दिखाई नहीं देते इसका कारण समझने की आवश्यकता है। जब हमारा मन निर्मल होने लगेगा तो भगवान हमें सर्वत्र दिखाई देने लगेंगे। मन को निर्मल करने के लिए प्रभु श्रीराम के नाम और उनकी कथा का श्रवण हमेशा करना चाहिए।पूज्य राजन जी ने यह भी कहा कि जब तक हमारे मन में भेद रहेगा तब तक हम श्रीभगवान की महिमा को महसूस नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह कहा जाता है कि जब जब धरम की हानि होती है तब तब श्रीभगवान अवतार लेते हैं। यहां आशय धर्म की हानि से नहीं अपितु धर्म के स्थान पर अधर्म के बोलबाला बढ़ने से होता है। जब जब भक्तों पर अत्याचार होता है तब तब अधर्म का बोलबाला भी बढ़ता है। इस अधर्म के वातावरण को समाप्त करने के लिए श्री भगवान अवतार लेते हैं। ये घटनाएं कई बार घटित हुई हैं। पूज्य राजन जी ने बताया कि अब तक श्रीभगवान पांच तरह के अवतार ले चुके हैं। प्रथम तरह का अवतार अंश अवतार है जिसके उदाहरण कछुआ और मत्स्य अवतार हैं। द्वितीय तरह का अवतार आवेशा अवतार है जिसके उदाहरण दत्तात्रेय और भगवान बुद्ध का अवतार हैं। तृतीय तरह के अवतार विशिष्ट अवतार है जैसे नरसिंह अवतार। चतुर्थ तरह के अवतार पूर्ण अवतार हैं जैसे राम और कृष्ण के अवतार हैं। पंचम तरह के अवतार महापुरुष अवतार है। जब अयोध्या में श्रीभगवान पूर्ण अवतार लेते हैं तो पूरी अयोध्यानगरी में मंगल अहसास अनुभूत होने लगा। गालियां संवर जाती है और पूरा वातावरण सुगंधित और सुवासित हो उठता है।तृतीय दिन की कथा के दिन मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद और धर्मशिला देवी के साथ दैनिक यजमान के तौर पर डॉक्टर राम इकबाल गुप्ता, डॉक्टर कंचन माला गुप्ता, डॉक्टर रामेश्वर सिंह, डॉक्टर सृष्टि सौम्या, डॉक्टर गणेश दत्त पाठक, रेखा पाठक, दीपक सिंह, रिंकी देवी, डॉक्टर अमरेश कुमार, डॉक्टर संध्या देवी, डॉक्टर सुशील कुमार, डॉक्टर रूपम सिंह, रजनीश वर्मा, शिखा वर्मा, रामबाबू प्रसाद और निर्मला देवी रहे। जबकि श्रीराम कथा के तीसरे दिन अतिथि के तौर पर डॉक्टर आर एन ओझा, डॉक्टर अशोक प्रियंवद, जिला बंदोबस्त अधिकारी श्री सुजीत कुमार, उपसमाहर्ता जूली कुमारी, कला और संस्कृति की प्रभारी पदाधिकारी शालू कुमारी, जिला श्रम पदाधिकारी सुधांशु शेखर पाण्डेय, जिला नेटवर्क अभियंता हिमांशु प्रकाश आदि मौजूद रहे। सदर एसडीएम आशुतोष गुप्ता, उनके पिता गोविंद गुप्ता और माता किरण गुप्ता प्रतिदिन कथा श्रवण हेतु पधार रहे हैं। मंगलवार को जे एन एस पब्लिक स्कूल के छात्र कथा श्रवण के लिए पहुंचे।आगत अतिथियों का स्वागत श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार, कोषाध्यक्ष प्रेमशंकर सिंह द्वारा किया गया। मंगलवार को कथा वाचन के पूर्व पूज्य राजन जी ने प्रज्ञा प्रवाह के संपर्क पत्रक का विमोचन भी किया।


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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति को सम्मानित कर समाज निर्माण में उनके योगदान को सराहा गया
लोकतंत्र न्यूज नेटवर्क,सिवान ;- रविवार रविवार को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंबेडकर संवाद कक्ष में कला, संस्कृति विभाग, बिहार सरकार और जिला प्रशासन, सीवान के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें नारी शक्ति को सम्मानित कर समाज सृजन में उनके योगदान को सराहा गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गोपालगंज वन प्रमंडल अधिकारी मेधा यादव ने कहा कि प्रकृति और नारी दोनों ही सृजन का आधार रही है। नारी का सम्मान समाज में सकारात्मकता का संचार करता है। उन्होंने बताया कि उनके गांव में लड़कियों के पढ़ने की अच्छी व्यवस्था नहीं थी लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार किया। आज नारी को सहानभूति की नहीं जागरूक और आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला पदाधिकारी सीवान, श्री विवेक रंजन मैत्रेय ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिए जिला प्रशासन सदैव प्रयासरत है। केंद्र और राज्य सरकार की नारी सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को संजीदगी से क्रियान्वित किया जा रहा हैं। पुलिस अधीक्षक, सिवान पूरन कुमार झा, डीडीसी सीवान, मुकेश कुमार, सिविल सर्जन सिवान, श्रीनिवास कुमार, महराजगंज अनुमंडल पदाधिकारी अनीता सिन्हा, पीजीआरओ इस्तियाक अली मंचासीन रहे।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आंबेडकर संवाद कक्ष में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत आगत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। स्थापना उपसमाहर्ता जूली कुमारी द्वारा आगत अतिथियों को पौधा और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर केक काटकर नारी शक्ति को शुभकामनाएं प्रेषित की गई। राजवंशी देवी इंटर कॉलेज की बालिकाओं ने संगीत शिक्षक तेजनाथ यादव के नेतृत्व में मनोहारी स्वागत गान के साथ एक मधुर लोक गीत को भी प्रस्तुत किया। डी एम सिवान ने इन बालिकाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। मंच संचालन शिक्षिका वीनस दीक्षित ने किया। धन्यवाद ज्ञापन स्थापना उपसमाहर्ता जूली कुमारी ने किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देनेवाली नारी शक्ति को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। सम्मानित होने वालों में महाराजगंज एसडीएम श्रीमती अनीता सिन्हा, स्थापना उप समाहर्ता जूली कुमारी, जिला सामान्य शाखा प्रभारी शालू कुमारी, डीपीओ आईसीडीएस तरणि कुमारी, सीओ लकड़ी नवीगंज कुमारी नेहा, बीडीओ नौतन अंजली कुमारी, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी सुश्री राजनंदिनी साह, डॉक्टर रीता सिन्हा, डॉक्टर सविता कुमारी, पिंकी कुमारी, पतार मुखिया संध्या देवी, आशिता गुप्ता, दुर्गा कुमारी, प्रिया कुमारी, अंकिता शर्मा, नीतू कुमारी, काजल कुमारी, लक्की कुमारी आदि शामिल रहे। इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण उपनिदेशक उपेन्द्र कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी संजय झा,कुमारी सलोनी,सामाजिक कार्यकर्ता गणेश दत्त पाठक सहित भारी संख्या में महिलाएं उपस्थित रही।


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