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वीर शहीद राम कुमार यादव को दी गयी भावभीनी श्रद्धांजलि
लोकतंत्र न्यूज सिवान ;- विशेष कार्य बल (SOG-8), मोतिहारी, बिहार में पदस्थापित वीर शहीद श्री राम कुमार यादव को आज मंगलवार को उनके पैतृक गाँव पुरैना, थाना मुफ्फसिल, सिवान में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर पुलिस उप-महानिरीक्षक, सारण, जिलाधिकारी सिवान एवं पुलिस अधीक्षक सिवान सहित अन्य पदाधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को नमन किया तथा उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को विनम्र श्रद्धा से स्मरण किया।
उल्लेखनीय है कि दिनांक-16.03.2026 को पूर्वी चम्पारण मोतिहारी जिला अंतर्गत चकिया थाना क्षेत्र में अपराधियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान वे अदम्य साहस का परिचय देते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।






शहीद श्री राम कुमार यादव का यह बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा तथा उनका शौर्य एवं कर्तव्यनिष्ठा हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी रहेगी।
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नौ दिवसीय श्रीराम कथा का हुआ समापन,भावुक हुए श्रद्धालु
“दुनियाभर में श्रीराम कथा कहते हैं लेकिन सीवान में श्रीराम कथा कहने का आनंद अद्भुत”
सीवान में राजन जी महाराज द्वारा हो रही श्रीराम कथा को मिला विश्राम, महाभंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया महाप्रसाद
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ;- नगर अवस्थित वी एम एच ई इंटर कॉलेज के प्रांगण में हो रहे नौ दिवसीय संगीतमय, लालित्यपूर्ण, रसमयी श्रीराम कथा को सोमवार को विराम मिला।कथा के अंतिम दिन श्रीराम कथा कहते हुए राजन जी महाराज ने बेहद भावुक होकर कहा कि मैं तो विश्व के हर कोने में श्रीराम कथा कहता रहा हूं। लेकिन जो आनंद की अनुभूति अपने गृहनगर में कथा कहने में होती है वह अद्भुत है।उन्होंने कहा कि मैंने 2011 में श्रीराम कथा कहना प्रारंभ किया तबसे तकरीबन 12 साल बाद 2023 में मैंने गांधी मैदान में श्रीराम कथा कही।इसके बाद 2026 में वी एम इंटर कॉलेज में श्रीराम कथा कहने का सौभाग्य मिला।
इसके लिए उन्होंने श्रीराम कथा आयोजन समिति, सिवान को धन्यवाद दिया।सोमवार को श्री राम कथा के विराम पर महाभंडारा आयोजित हुआ देर रात तक शचले भंडारा में हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद को ग्रहण किया।
श्रीराम कथा के विराम पर श्रीराम कथा आयोजन समिति, सिवान ने नगरवासियों समेत प्रशासन तथा अन्य सहयोगियों के प्रति आभार जताया।सोमवार को श्रीराम कथा का प्रारंभ रूपेश कुमार, नेहा गुप्ता, हर्ष कुमार आदि द्वारा श्रीराम चरित मानस की आरती के साथ हुआ।राजन जी ने हनुमान जी द्वारा सीता माता का पता लगाने के लिए लंका जाने और रास्ते में आई चुनौतियों के बारे में बताया। जामवंत के बारे में बताते हुए कहा कि हर घर, समिति में एक बुजुर्ग का होना लाभदाई रहता है क्योंकि उनके पास अनुभव होता है इसलिए परिवारजन जब भी किसी चुनौती का सामना करें तो उन्हें परिवार के ही किसी बुजुर्ग से परामर्श करना चाहिए।राजन जी ने कहा कि जब हनुमान जी लंका के लिए चले तो सभी को काम पूर्ण होने का विश्वास हुआ क्योंकि हनुमान जी को विशेष हर्ष हो रहा था। उन्होंने कहा कि जब भी कोई काम प्रसन्न होकर किया जाता है तो उस काम के सफल होने की संभावना बढ़ जाया करती हैं।

राजन जी ने हनुमान जी के सीता माता का दर्शन करने, अशोक वाटिका के विध्वंश और लंका दहन के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि हनुमान जी प्रभु श्रीराम को अपने मन में स्मरण करते हुए सभी काम करते चले और सीता माता के बारे में सूचना भगवान श्रीराम तक पहुंचाया। लंका में विभीषण से हनुमान जी से मुलाकात फिर प्रभु श्रीराम द्वारा विभीषण का राज्याभिषेक, मेघनाथ, कुंभकर्ण, रावण विनाश की कथा सुन श्रद्धालु भक्तिभाव के सागर में गोते लगाते रहे। भगवान राम के अयोध्या में राज्याभिषेक के उपरांत श्री राम कथा को विराम दिया गया।

श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार ने श्रीराम कथा के सफल संचालन के लिए सभी के सहयोग के लिए आभार जताया।
फिर एक विशाल महाभंडारे का आयोजन हुआ जो दोपहर से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा।श्रद्धालु ने भी भव्य व सुंदर आयोजन की सराहना करते हुए आयोजन समिति का आभार जताया।
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भिक्षु बन के प्रसन्न रहना संतों से सीखें – राजन जी महाराज
लोकतंत्र न्यूज नेटवर्क,सिवान ;- नगर के वीएम उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज परिसर में श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से चल रहे नौ दिवसीय संगीतम श्रीराम कथा के सातवें शनिवार को राजन जी द्वारा केवट प्रसंग सुन श्रद्धालु भावाभिभूत हो गए।अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी महाराज ने म धुर स्वरलहरियों के बीच “करूणानिधान रउआ जगत के दाता हई” भजन पर उपस्थित श्रद्धालु भावाभिभूत हो गए और जम के थिरके।पर्यावरण बोध के संदेश के प्रसार के क्रम में माँ गंगा की महिमा का गुणगान भी राजन जी ने किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के कार्य में हमेशा सहयोग करना चाहिए बाधा उत्पन्न करने पर कलंक लगता है। सब कुछ होता तो प्रभु श्रीराम की कृपा से ही है।शनिवार को श्रीराम कथा का प्रारंभ यजमानगण मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद, धर्मशिला देवी, सह यजमान रूपेश कुमार, नेहा गुप्ता आदि दैनिक यजमान इंजीनियर अशोक कुमार पांडेय, अनीता पाण्डेय, राजीव चौबे , पुष्पा चौबे, वैभव कुमार, प्रीति चौरसिया, कन्हैया आदि द्वारा श्रीराम चरित मानस की आरती के साथ कथा प्रारंभ हुई। भगवान श्रीराम के मिथिला से विवाह के उपरांत अयोध्या पहुंचने के प्रसंग पर कथा प्रारंभ हुई। राजन जी ने कहा कि जीवन के किसी भी परिस्थिति में यदि मनुष्य आनंद में रहना चाहता है तो अयोध्याकांड के प्रथम आठ चौपाई का पाठ नियमित तौर पर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में आनंद बना रहे इसके लिए केवल धन का होना आवश्यक नहीं है। अभाव में भी संतुष्ट रहना चाहिए। संतोष ही सबसे बड़ा सुख है। राम का नाम लेते रहिए और अपना कर्म करते रहिए। प्रभु श्रीराम की कृपा अवश्य प्राप्त होगी। दुनिया के लोग दौलत पकड़ के मुस्कुराते अवश्य हैं लेकिन भिक्षु बन के खुश रहना तो संतों से सीखना चाहिए। उन्होंने बताया कि भिक्षु और भिखारी में अंतर होता है। अयोध्या में दशरथ जी भगवान श्री राम का राज्याभिषेक करने की व्यवस्था बनाते हैं लेकिन मंथरा की मति बदलते ही उसके सलाह पर माता कैकेई श्रीराम के वन जाने जाने और भरत के राज्याभिषेक का वरदान मान लेती हैं। इसमें माता कैकई का कोई दोष नहीं था अपितु यह तो प्रभु की इच्छा ही थी।राजन जी ने कहा कि जो मनुष्य राम विमुख हो जाता है उसकी मति कभी भी बदल जाती है। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने पर उसमें क्रेडिट लेने वाले बहुत लोग मिल जाते हैं लेकिन असफलता मिलने पर लोग पास भी नहीं आते। इसलिए दुनिया के बजाय अपने कर्म पर सदैव ध्यान देना चाहिए। आपका स्नेही वहीं है जो आपकी असफलता पर भी आपसे प्रेम जताता है।राजन जी ने कहा कि भगवान श्रीराम वन के लिए माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ निकले। राजा दशरथ ने सुमंत को भेजा कि रथ लेकर जाएं।वन में निकलने पर मित्र निषादराज से मुलाकात होती है। उन्होंने कहा कि मित्र, स्वामी, गुरु, बहन के यहां कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। अपने सामर्थ्य के अनुरूप कुछ न कुछ उपहार लेकर जाना चाहिए। राजन जी ने कहा कि गंगा पार करने के क्रम में अपने महान भक्त केवट से भगवान श्रीराम की मुलाकात होती है। केवट गुहार लगाते हैं कि पाव धुलवा के थोड़ी नजर कीजिए आइए बैठिए फिर सफर कीजिए।

केवट के विनय पर भगवान पहले तो मौन रहते हैं। फिर केवट की निर्मल भक्ति से प्रसन्न हो भगवान उसे पांव पखारने की अनुमति देते हैं। केवट प्रसंग को सुन उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।शनिवार को श्रीराम कथा के दौरान महराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विद्या भारती के प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह,सिवान विभाग निरीक्षक श्री अनिल कुमार राम, श्री राजेश रंजन, श्री कृष्ण कुमार प्रसाद, श्री ललित राय, प्रधानाचार्य डॉक्टर कुमार विजय रंजन,श्री कमलेश नारायण सिंह, भाजपा नेता मुकेश कुमार बंटी, वी एम एच ई के प्रधानाचार्य राकेश कुमार सिंह, शिक्षाविद् पुष्पेंद्र पाठक बतौर अतिथि मौजूद रहे। आगत अतिथियों का स्वागत श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार, कोषाध्यक्ष प्रेमशंकर सिंह, सदस्य दीपक कुमार सिंह ने किया।


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प्रसन्नता से किया जाने वाला कार्य सदैव सफल होता है – राजन जी महाराज
लोकतंत्र न्यूज नेटवर्क,सिवान ; – श्रीराम कथा के पंचम दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी ने मिथिला के धनुष यज्ञ के प्रसंग का किया वर्णनसीवान। नगर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में राजन जी महाराज के श्रीमुख से हो रही श्रीराम कथा के पंचम दिन प्रारंभ में ताड़का वेद विद्यालय और रेणुआ स्थित श्री वैष्णव प्रताप सिंह वैदिक गुरुकुल के बटुकों के मंत्रोच्चार को सुन राजन जी महाराज मंत्रमुग्ध हो गए। श्रीराम कथा वाचन के दौरान गुरुवार को उन्होंने अहल्या उद्धार, विश्वामित्र मुनि संग श्रीराम और लक्ष्मण का मिथिला प्रवास, धनुष यज्ञ आदि प्रसंगों का वर्णन किया। श्रीराम कथा वाचन के दौरान राजन जी ने कहा कि भगवान तो सिर्फ भाव के भूखे होते हैं। उन्हें न तो धन लुभाता है और न वैभव। जटायु के प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। परहित से आशय उस व्यक्ति के हित से होता है जिसको न आप जानते हो न वो आपको जानता हो । परहित करने का भाव भी जागृत होने लगे तो फिर संसार में कुछ दुर्लभ नहीं होता। दूसरे का हित ही जीवन को सार्थक बनाता है।उन्होंने कहा कि भगवान राम जब किशोरावस्था में मुनि विश्वामित्र के साथ पिता दशरथ की आज्ञा पर घर से निकले तो उनके चेहरे पर एक सुंदर मुस्कान थी। राजन जी ने कहा कि कोई भी काम प्रसन्न होकर किया जाता है तो उसके पूर्ण होने की संभावना ज्यादा होती है। कार्य बताता है कि किस भाव से किया गया है? स्वभाव के भाव का अभाव होगा तो स्वरूप बिगड़ जाएगा।जीवन में पुण्य बढ़ाने के लिए प्रयास होने चाहिए। जहां सतयुग में सत्य, तत्व, दया , दान महत्वपूर्ण थे वहीं द्वापर युग में दया और दान। कलियुग में दान को सर्वश्रेष्ठ उपाय बताया गया है। कलयुग में निश्चित तौर पर अर्थ की प्रधानता है परंतु पुण्य अर्जित करने के लिए एक रूपये की आवश्यकता नहीं है। श्रीराम कथा सुनने, सेवा भावना, माता पिता और गौ माता की सेवा आदि से पुण्य अर्जित किया जा सकता है।ऋषि विश्वामित्र के साथ जाते भगवान श्रीराम गौतम ऋषि के आश्रम से गुजरते हैं। वहां उनके चरण रज से अहल्या का उद्धार होता है। इस प्रसंग में राजन जी ने कहा कि जीवन में किसी के दोष की चर्चा नहीं करनी चाहिए। मुनि विश्वमित्र ने भगवान को अहल्या के बारे मेंं बताया। जब संत कृपा करते हैं तो भगवान भी कृपा कर ही देते हैं। राजन जी ने कहा कि केवल भगवान ही हैं जो बिना किसी कारण के प्रेम करते हैं। भगवान भक्तों से किसी चीज की अपेक्षा नहीं रखते हैं वो तो बस भाव के भूखे होते हैं। इसलिए चाहे आप जितने भी जंजाल में हो भगवान का स्मरण करें, भजन के लिए समय निकालें। जैसे भोजन के लिए समय निकल ही जाता है वैसे ही भजन के लिए समय निकाले, अदभुत आनंद की अनुभूति होगी।राजन जी ने मुनि विश्वमित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के मिथिला पहुंचने और धनुष यज्ञ में भाग लेने का मनोहारी चित्रण किया। मिथिला के बाग में श्रीराम सीता के प्रथम बार एक दूसरे को देखने के प्रसंग पर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। सीता जी द्वारा माता गौरी जी के पूजन के प्रसंग में जब “गिरिवर राज के किशोरी हे मैया, पैया तोड़ी पड़ूं” गाया तो कथा पांडाल में श्रद्धालु थिरक पड़े। राजन जी ने कहा कि भगवान की पूजा मनोकामना पूरी होने के बाद बंद नहीं करना चाहिए अपितु उसके बाद पूजन और बढ़ा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु 108 एकादशी का व्रत अपने जीवन में कर लेता है उसका संपूर्ण जीवन मंगलमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रशंसा करना भी एक स्वभाव है,जिसे जीवन में समाहित करना चाहिए। गुरुवार को कथा श्रवण के लिए नगर उपसभापति किरण गुप्ता, रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स क्लब के संचालक संजय पाठक सहित कई न्यायाधीशगण, प्रशासनिक अधिकारी, अन्य गणमान्य कथा स्थल पर पहुंचे जिनका स्वागत श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार, संरक्षक डॉक्टर रामेश्वर कुमार, डॉक्टर राम इकबाल गुप्ता द्वारा किया गया। श्रद्धा भाव से परिपूर्ण कई अतिथि भूमि पर बैठकर कथा श्रवण के आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। गुरुवार को यजमान के रूप में जिला बीस सूत्री के उपाध्यक्ष संजय पांडेय, रंजना पांडेय, लायंस क्लब के अध्यक्ष विकास सोमानी, नेहा सोमानी, राजेश गुप्ता, अनुराधा गुप्ता, डॉक्टर नवल किशोर पांडे, संगीता पांडेय आदि रहे। गुरुवार को कथा पांडाल खचाखच भरा हुआ था। कुछ बाल स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सेवा करते देखे गए। मंच संचालन राजेश पांडेय और अंजनी पांडेय ने किया। पौराणिक महत्व वाली पंगनूर गाय को देखने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था।


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