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आध्यात्मिक पूर्णता एवं बौद्धिक चिन्तन का महापर्व है गुरु पूर्णिमा
गुरुपूर्णिमा पर विशेष
*सनातन संस्कृति में अथाह सागर जैसा है हमारे यहां मनाएं जाने वाले पर्व, त्यौहार, व्रत एवं उत्सव। इसकी सीमा पाना बहुत ही कठिन है हमारे परम साधक सन्त ऋषियों ने अपने दिव्य साधना, भक्ति एवं ज्ञान बल से इस उपहार को भारतभूमि को विरासत में दिया। भगवान की कृपा से प्रत्येक जीवात्मा का जन्म मां की कोख से होता है, लेकिन उसे जीवन की आध्यात्मिक ज्ञान गुरु की चरण-शरण से प्राप्त होती है। शास्त्र गुरुभक्ति के प्रताप की महिमा बताते हुए कहते हैं कि क्षण मात्र गुरु सान्निध्य और गुरु गौरवगान से जीवात्मा को सद्गति का योग सहज बन जाता है। स्वयं भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं गुरु सम्पूर्ण जप, पूजा, उपासना, ध्यान आदि का मूल है-ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोःपदम्। मंत्रमूलं गेरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोःकृपा।

अर्थात् गुरुमूर्ति ध्यान का मूल है, गुरुचरण पूजा का मूल है, गुरुवाक्य कल्याणकारक मूलमंत्र है और गुरुदेव की कृपा साक्षात् मोक्ष का मूल है। अर्थात् हर शिष्य के लिए गुरु ही उसके जीवन, ज्ञान, तप, संकल्प,सेवा के मूल आधार होते हैं, उसी से मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने की ऊर्जा मिलती है। इस दृष्टि से गुरु और शिष्य का सम्बन्ध चेतना के उच्च धरातल का सम्बन्ध माना गया है।आध्यात्मिक विकास और व्यक्तिगत ज्ञान के क्षेत्र में, गुरुपूर्णिमा प्रेरणा का प्रतीक और गहन चिन्तन विस्तार का पर्व है। इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व आध्यात्मिक विकास और आंतरिक यात्रा के लिए अत्यधिक महत्व रखता है।यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारतीय परंपरा में, प्रत्येक त्यौहार खगोलीय घटनाओं से सम्बन्धित है। ये घटनाएँ सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों और तारों से जुड़ी खगोलीय घटनाओं को संदर्भित करती हैं। इन घटनाओं के समय होने वाले परिवर्तन रहस्यमय ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह वह रहस्यमय ऊर्जा है जिसका हम अधिकतम क्षमता में उपयोग करने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि हम पृथ्वी पर त्यौहार मनाते हैं, ताकि हम इस गहन ऊर्जा का उपयोग कर सकें। गुरुपूर्णिमा में गुरु और पूर्णिमा दोनों शब्द शामिल हैं, जो दर्शाता है कि यह त्यौहार पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। वैसे तो हर महीने मास में पूर्णिमा होती है, लेकिन आषाढ़ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा में कुछ खास बात होती है। उस दिन चंद्रमा बृहस्पति द्वारा शासित धनु राशि में होता है। इस बीच, सूर्य मिथुन राशि के विपरीत 180 डिग्री पर स्थित होता है; इसलिए उस दिन गुरु की ऊर्जा अपने चरम पर होती है। इन अनोखी ब्रह्मांडीय घटनाओं का लाभ उठाने के लिए हम गुरुपूर्णिमा मनाते हैं।शास्त्र में इस शब्द पर बहुत ही गहनता से विचार किया गया है इसकी व्युत्पत्ति की बात करे तो ‘गुरु’ शब्द में ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ अंधकार का उन्मूलन है। एक बहुत प्रसिद्ध श्लोक है-गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकार स्थिते उच्यते।अन्धकार निरोधत्वात् गुरुरित्यभिधीयते॥गुरु केवल एक शिक्षक नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक, एक प्रबुद्ध आत्मा है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है और शिष्यों को आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ले जाता है।गुरु पूर्णिमा की जड़ें प्राचीन काल में देखी जा सकती हैं, जब महर्षि व्यास के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें दिव्य बुद्धि और ज्ञान के प्रतीक के रूप में देखे तो अपनी तीक्ष्ण बुद्धि एवं मेघाशक्ति के बल पर वेदों और पुराणों सहित प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों को व्यवस्थित करने, संपादित करने और वर्गीकृत करने का महत्वपूर्ण देन महर्षि वेदव्यास जी का है। उनके अलौकिक कार्य ने पीढ़ियों में ज्ञान के संरक्षण और प्रसार में क्रांति ला दी। उनके विषय में एक श्लोक प्रसिद्ध है-नमोस्तुते व्यास विशाल बुद्धे, फुल्लरविन्दायत पत्र उत्सव।येनत्वया भारत तैलपूर्ण: प्रज्ज्वलितो ज्ञानमय प्रदीप:।।हे व्यास, आपकी विशाल बुद्धि को नमस्कार है, जिनकी आंखें खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान हैं।आपके द्वारा, ज्ञान के तेल से भरे दीपक से, भरत वंश को प्रकाशित किया गया है।हमारे पारंपरिक शास्त्रों में, साधक की आध्यात्मिक यात्रा में गुरु की आवश्यक भूमिका पर ज़ोर देने वाले गहन संदर्भ हैं। उदाहरण के लिए, संस्कृत में रचित एक प्रतिष्ठित ग्रंथ भगवदगीता, गुरु-शिष्य सम्बन्ध के महत्व पर ज़ोर देती है। भगवान कृष्ण अपने शिष्य अर्जुन से कहते हैं :”तद्विद्धि प्रणिपतेन परिप्रश्नेन सेवया।उपदेक्षयन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः। “अर्थात आप एक आध्यात्मिक गुरु के पास जाकर सत्य जानने की कोशिश करना चाहिए। उनसे विनम्र भाव से अपनी जिज्ञासा करें और उनकी सेवा भी करें। आत्म-साक्षात्कार प्राप्त आत्माएँ आपको ज्ञान दे सकती हैं क्योंकि उन्होंने सत्य का साक्षात्कार किया है।गुरुपूर्णिमा के दिन शिष्य अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेकर और उन्हें कृतज्ञता के प्रतीक भेंट करके उनके प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करते हैं। ये भेंटें, अक्सर किताबों या शास्त्रों के रूप में, शिष्यों की आजीवन सीखने और ज्ञान की खोज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।इस दृष्टि से प्रति वर्ष आने वाली गुरुपूर्णिमा गुरु-शिष्य की आध्यात्मिक पूर्णता की अनुभूति का महोत्सव कह सकते हैं। ऐसे तो हमारी भारतीय परम्परा में गुरु-शिष्य का सम्बन्ध जन्म-जन्मांतर का है। गुरु-शिष्य का सम्बंध इसी जन्म का नहीं होता, अपितु अनेक जन्मों का, जन्म-जन्मांतर का होता है। शिष्य व गुरु के जन्म अवश्य बदल सकते हैं, पर दोनों के बीच जुड़ी प्रगाढ़ डोर अनन्तकाल तक के लिए जुड़ी रहती है ऐसी शास्त्रीय मान्यता है। गुरु-शिष्य के बीच यह तारतम्यता सभी धर्मों में समान है। गुरुपूर्णिमा प्रतिवर्ष हम सबके जीवन में गुरु को पहचानने और शिष्य भाव को परिपक्व करके गुरुधारण करने योग्य दुर्लभ दृष्टि जगाने का अवसर लेकर आती है, जो परिपक्व हो चुके हैं, उनको गुरुवरण करने और शिष्य बनने का सौभाग्य मिलता है, उन्हें गुरुपूर्णिमा पूर्णता का वरदान देती है। जिन साधकों में गुरुधारण करने की परिपक्वता जग जाती है, उन्हें सद्गुरु अपना लेते हैं। शिष्य भाव जागते ही गुरु की विद्याएं और क्षमताएं शिष्य की हो जाती हैं और शिष्य गुरु भाव से भर उठता है। इस प्रकार इस विशेष अवसर पर प्राप्त गुरुमंत्र सद्गुरु का शिष्य के लिए दिव्य आशीष बन जाता है, गुरुपर्व उस आशीष की अभिव्यक्ति भी है। कहते हैं शिष्यों को हर पूर्णिमा तिथि पर गुरुदर्शन करने से सोलह कलाओं से युक्त पूर्णचन्द्र का आशीर्वाद मिलता है। जबकि गुरुपूर्णिमा पर शिष्य द्वारा गुरु दर्शन-पादपूजन से उसके जीवन पर सूक्ष्म जगत के संतों-ऋषियों एवं भगवान सभी की कृपा बरसती है। शिष्य के सौभाग्य का उदय होता है। इस दृष्टि से इसे हम आध्यात्मिक सम्पूर्णता का महापर्व भी कह सकते है।इसीलिए इस खास दिवस गुरुपूर्णिमा पर प्रत्येक शिष्य अपने गुरुधाम पहुंचकर गुरु के दर्शन-पादपूजन, गुरुदक्षिणा देने, गुरु-चरणों में बैठने का लाभ अवश्य लेना चाहता है, भले उसका गुरु सात समंदर पार ही क्यों न बसता हो। इससे शिष्य के जीवन में पूर्व जन्म के संस्कारों का पुण्य फलित होता है, पविार में सुख, शांति, समृद्धि की वर्षा होती है। वास्तव मेंं विविध अवसरों पर सद्गुरुओं, सच्चे संतों का आदर सम्मान, गुरु पूजा करना, गुरुदक्षिणा देना किसी व्यक्ति के आदर तक ही सीमित नहीं रहता, अपितु वह साक्षात् सच्चिदानन्द परमेश्वर का आदर बन जाता है। इस पर्व पर गुरु को किया गया दान-पुण्य, गुरुकार्यों में किसी भी तरह का सहयोग अनंत फलदायी होता है। गुरु कृपा से उसकी झोली सुख-समृद्धि से आजीवन भरी रहती है। आइये हम सब अपने एक-एक पल का सदुपयोग करते हुए आनन्द, शक्ति, शांति के साथ गुरुधाम पधारने, गुरु संगत-सानिध्य में रहने का अवसर खोजे, सम्भव है हमारा शिष्य भाव परिपक्व होकर हमारे भी जीवन में गुरु घटित हो पडे़ और गुरु-शिष्य के अनुपम योग का सौभाग्य मिल जाये।गुरुपूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व भी है वैसे तो वर्ष भर में 12 पूर्णिमा आती हैं। जिसमें से कुछ पूर्णिमा का अत्यधिक महत्व है उसमें मुख्यरूप से शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा आते है, लेकिन आषाढ़ पूर्णिमा भक्ति व ज्ञान के पथ पर चल रहे साधकों के लिए एक विशेष महत्त्व रखता है। इस दिन आकाश में अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन (पराबैंगनी विकिरण) फैल जाती हैं। इस कारण व्यक्ति का शरीर व मन एक विशेष स्थिति में आ जाता है। उसमें भूख, नींद व मन का बिखराव कम हो जाता है। यह स्थिति साधक के लिए बहुत लाभदायक है। आधुनिकता के नाम पर भारत को पश्चिमी सभ्यता का नकलची बना डालें। पर मेरा विश्वास है,भावी भारत ऐसा अजेय होकर उभरेगा जो दुनिया में अज्ञानता के असुर का वध करेगा। और सम्पूर्ण विश्व को करुणा, दया और शांति से तृप्त करेगा। गुरुपूर्णिमा ज्ञान की खोज की निरंतर यात्रा, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास में गुरुओं के अमूल्य मार्गदर्शन का प्रतीक है। हम इस गहन परम्परा का हिस्सा बनने के लिए बहुत आभारी हैं जो जीवन भर सीखने, विनम्रता और प्रबुद्ध आत्माओं के मार्गदर्शन के माध्यम से ज्ञान की खेती के सार को रेखांकित करती है।अंत में, गुरुपूर्णिमा एक विशिष्ट त्यौहार है जो गुरुओं द्वारा आध्यात्मिक तथा बौद्धिक उन्नति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करता है। इस उत्सव के माध्यम से, भक्त अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं, आशीर्वाद मांगते हैं और कृतज्ञता दिखाते हैं। यदि हम गुरु शिष्य की गौरवशाली अनुभव की बात करें तो गुरु के शरीर में नीचे के भाग अर्थात काम से पुत्र की उत्पत्ति होती है लेकिन शिष्य तो उर्ध अर्थात ज्ञान मार्ग से उत्पन्न होता है। हमारे समाज में आज भी यह परम्परा कुछ विकृतियों की संकीर्णता में भी जीवित है। जिसका आदर्श स्वरूप आज भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दृष्टिगोचर है। इसीलिए अपनी गुरु परम्परा का सम्मान करते हुए स्वयं और अपने परिवार सहित समाज को इस व्यवस्था से जोड़े रखे ताकि कोई विकृति न आ जाए।
लेखक – डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय, श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास तथा मन्दिर एवं गुरुकुल योजना सेवा प्रमुख जम्मू कश्मीर प्रान्त।
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होटल सफायर इन में शारदीय नवरात्र पर हुआ फलाहार का आयोजन,पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय सहित कई गणमान्य लोग हुए शामिल
- फलाहार के बहाने सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ;- शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर होटल सफायर इन में शनिवार को फलाहार कार्यक्रम आयोजित किया गया।आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली।सदर विधायक एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय,गोरियाकोठी विधायक देवेशकांत सिंह,दरौंदा विधायक कर्णजीत सिंह,भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय पांडेय,आइएमए के सचिव एवं सिवान योग संघ के अध्यक्ष डॉ शरद चौधरी,दयानन्द आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के शासी निकाय के सलाहकार एवं पूर्व प्राचार्य डॉ प्रजापति त्रिपाठी,जदयू जिलाध्यक्ष विकाश सिंह उर्फ़ जिशू सिंह तथा डॉ रुपेश कुमार सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और माँ दुर्गा के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।आयोजन में राजनीतिक, सामाजिक और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और सनातन संस्कृति की परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया.पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अपने संदेश में कहा कि शारदीय नवरात्र आस्था, शक्ति और संस्कारों का पावन पर्व है. इस अवसर पर होने वाले फलाहार कार्यक्रम धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ समाज में आपसी सद्भाव और एकजुटता का संदेश देते हैं. उन्होंने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की तथा प्रदेशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं.आयोजक रुपेश कुमार ने कहा कि फलाहार कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य धार्मिक जागरूकता बढ़ाने के साथ सामाजिक एकता को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में युवा पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना जरूरी है. ऐसे आयोजन युवाओं को सनातन धर्म की परंपराओं, संस्कारों और उसके मूल संदेशों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक उपदेश देना नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक एकता और आपसी सद्भाव को प्रोत्साहित करना भी है.


भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजय कुमार पांडे ने कहा कि हर वर्ष शारदीय नवरात्र में फलाहार कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. ऐसे आयोजन आस्था और परंपराओं को मजबूत करने के साथ समाज में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा जारी रहेगी. उन्होंने मां दुर्गा से सभी पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की.


कार्यक्रम में समाजसेवी सुभाष प्रसाद सोनी, लोक अभियोजक प्रमिल कुमार गोप,दयानन्द आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सुधांशु शेखर त्रिपाठी,डॉ धीरेन कुमार,नगर परिषद की उपसभापति किरण गुप्ता, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष लीलावती गिरि,प्रदेश मंत्री मुकेश कुमार सिंह कुशवाहा, नगर परिषद की पूर्व सभापति अनुराधा गुप्ता, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अभिमन्यु कुमार सिंह, डॉ राजा प्रसाद, जादूगर विजय, प्रेम शंकर सिंह, डॉ सौरभ सिंह, डॉ ऋचा सिंह,हरेंद्र सिंह कुशवाहा और धनंजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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कला प्रदर्शनी “आँचरा की छांव में हमारी लोक धरोहर ” का डीएम ने दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ,पारंपरिक कला हमारी अनमोल धरोहर ; डीएम
लोकतंत्र न्यूज ,सिवान ;- रसमंजरी फाउंडेशन द्वारा शुक्रवार को आयोजित एकदिवसीय जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने दीप प्रज्वलित कर किया।शारदीय नवरात्र के दौरान ग्रामीण महिला लोककलाकारों द्वारा निर्मित दूसूती और सुजनी कलाकृतियाँ दिखाई गई कला प्रदर्शनी में प्राचीन विलुप्त होती कला और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए प्रयासरत संस्था रसमंजरी फाउंडेशन द्वारा शुक्रवार को शारदीय नवरात्र के अवसर पर मातृ शक्ति के सृजन को समर्पित एक कला प्रदर्शनी ” आँचरा की छांव में हमारी लोक धरोहर” रसमंजरी फाउंडेशन के प्रांगण में आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि श्री विजय प्रकाश मीणा भा. प्र. से. जिलाधिकारी, सिवान ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और ग्रामीण कलाकार महिलाओं से संवाद कायम किया।इस अवसर पर उन्होंने इस प्रदर्शनी एवं क्लाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि,“पारंपरिक कला हमारी संस्कृति की अनमोल धरोहर है,आवश्यकता इस बात की है कि पारंपरिक कला के प्रसार में सहभागिता निभाई जाय एवं लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया जाय। सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सभी को भूमिका निभानी चाहिए।रसमंजरी फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में पहुंचने पर लोक कलाकारों द्वारा प्राचीन पारंपरिक लोकनृत्य पखाउज के माध्यम से भव्य स्वागत किया गया।ग्रामीण महिला कलाकारों ने जिलाधिकारी महोदय के ललाट पर तिलक लगा व दूसूती निर्मित गुलाब के फूल भेंट कर स्वागत किया।निदेशक श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव और श्रीमती कन्नूप्रिया ने बताया कि इसमें ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार प्राचीन दूसूति और सुजनी कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया।माननीय प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बिहार को दूसूती कलाकृतियों की अनुपम सौगात देने वाली लोककलाकार आरती देवी की कलाकृतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।जिलाधिकारी ने ग्रामीण महिला कलाकारों से बात कर उनका उत्साहवर्धन किया और प्राचीन कलाकृति धरोहर को आगे बढ़ाने में योगदान की सराहना किया।कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रसिद्ध कलाकार एवं समाजसेवी जादूगर विजय जी ने किया।इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उप निदेशक उपेंद्र कुमार,जिला पंचायती राज पदाधिकारी बालेंदु नारायण पांडेय,सामाजिक कार्यकर्ता गणेश दत्त पाठक,आमोद शरण गोस्वामी,उमेर फरीद, कला शिक्षक चंदन कुमार,समारोह के अध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी,स्वागताध्यक्ष डॉ राजन कल्याण सिंह,संरक्षक डॉक्टर रुपेश कुमार,राम प्रेम शंकर सिंह शामिल रहे।वहीं विशाल श्रीवास्तव,रसमंजलि फाउंडेशन के निर्देशक अनिल कुमार श्रीवास्तव व कन्नू प्रिया दुसुती कला के गुरु आरती देवी ने व्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाई।

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भारत गौरव देश रत्न राजेंद्र मेमोरियल फाउंडेशन ने विश्व स्वक्षता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर स्वक्षता अभियान से जुड़ने का किया आह्वान
लोकतंत्र न्यूज,सिवान;- विश्व छात्र दिवस ,विश्व हस्त प्रक्षालन दिवस एवं विश्व ग्रामीण महिला दिवस के संयुक्त अवसर पर गुरुवार को भारत गौरव देश रत्न राजेंद्र मेमोरियल फाउंडेशन के सौजन्य से वी.एम. हाई स्कूल मैदान में हस्त प्रक्षालन कार्यकम आयोजित किया गया।जिसमें बच्चों ने मंच से हाथ धुलाई कार्यक्रम का डेमो दिखाकर उपस्थित सभी बच्चों को तथा आमंत्रित अतिथि गणों को इस स्वच्छता अभियान से जुड़ने हेतु जागरूक किया।फाउंडेशन के महासचिव इंजीनियर प्रमोद कुमार मल्ल ने अतिथियों का स्वागत करने के साथ संस्था परिचय, कार्यक्रम उद्देश्य बताते हुए कहा कि आज सामूहिक हैंडवॉश कार्यक्रम छात्रों द्वारा फाउंडेशन के संयोजन में देश के विभिन्न विद्यालयों एवं स्थलों पर भी निर्धारित समय पूर्वाहन 11:11 बजे दिन में हो रहे हैं और 5.30 लाख से ऊपर विद्यार्थी अभी तक इस अभियान से जुड़ चुके हैं।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाने-माने नेत्र चिकित्सक और आई.एम.ए.सिवान के सचिव डॉ शरद चौधरी ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।तत्पश्चात माँ सरस्वती,डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी के तैल चित्र पर मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों ने पुष्पांजलि अर्पित किया।

उक्त कार्यक्रम में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी पर आयोजित सिवान के एक दर्जन से ऊपर विद्यालय में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विजेता हुए छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट वक्ता सम्मान से सम्मानित किया गया।इसके पहले अतिथियों को संस्था की तरफ से स्मृति चिन्ह,अंग वस्त्र एवं पौधा देकर सम्मानित किया गया।उक्त अवसर पर अलग-अलग विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षिकाओं सहित वीएम.एच.ई के एक दर्जन से ऊपर शिक्षक शिक्षिकाओं को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया।बच्चों ने अपनी मधुर वाणी में भाषण देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।संस्था के महासचिव इंजीनियर प्रमोद कुमार मल्ल ने अपने संबोधन में कहा कि, “यह कार्यक्रम डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एवं डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को समर्पित है,समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा। खासकर देश का भविष्य छात्र-छात्राओं के लिए इस प्रकार के स्वच्छता एवं शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाला कार्यक्रम हमेशा आयोजित किया जाएगा”। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉक्टर अरविंद आनंद ने कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए समा बांध दिया।मौके पर छात्र छात्रों ने स्वागत गीत गाकर तथा वी.एम.एच.ई के संगीत शिक्षक ने बांसुरी वादन से सभी का मन मोह लिया।उक्त कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वी.एम.एच.ई के प्रधानाध्यापक राकेश कुमार सिंह,विशिष्ट अतिथि अभिमन्यु सिंह,पूर्व सांसद ओम प्रकाश यादव,मार्शल एजेंसी के निदेशक पारस नाथ पंडित,देव भोग के प्रतिनिधि वीर कुंवर सिंह, रामेश्वर सिंह जीरादेई,गजानन पांडेय,उमेश मल्ल, संस्कार भारती के संरक्षक जादूगर विजय जी,राम प्रेम शंकर सिंह,पत्रकार सचिन पर्वत,बालाजी पाण्डेय,चंद्रमोहन सिंह, राम इकबाल सिंह,रामदेव राम,उपेंद्र पांडेय उपस्थित रहे।
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Uncategorized4 days agoहोटल सफायर इन में शारदीय नवरात्र पर हुआ फलाहार का आयोजन,पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय सहित कई गणमान्य लोग हुए शामिल
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Uncategorized6 days agoभारत गौरव देश रत्न राजेंद्र मेमोरियल फाउंडेशन ने विश्व स्वक्षता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर स्वक्षता अभियान से जुड़ने का किया आह्वान
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