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व्याधिक्षमत्व बढ़ाने के लिये 168 मिनट प्रति सप्ताह वनानुभव लीजिये- डॉ अनुपम आदित्य मिश्र, एम डी
💫प्राचीन भारत के महर्षि-वैज्ञानिक पुनर्वसु आत्रेय को चिकित्सा व स्वास्थ्य-रक्षण के एक ऐसे सिद्धांत का जनक माना जाता है जिसे आज वनानुभव और प्रकृति-अनुभव (फ़ॉरेस्ट -एक्सपीरियंस, नेचर-एक्सपीरियंस) आदि नामों से जाना जाता है| स्वास्थ्य-रक्षण और रोगोपचार में प्राकृतिक स्थलों की भूमिका का आयुर्वेद में कम से कम 1000 साल ईसा पूर्व से वर्णन प्राप्त होता है| हाल ही में हुई शोध अब यह निर्विवाद सिद्ध करती है कि प्रकृति का सानिध्य हमारे संज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक, शारीरिक, मानसिक और बायोफिज़ियोलॉजिकल स्वास्थ्य में सुधार करता है| परन्तु सबसे बड़ी बात यह है कि वर्ष 2022 तक की शोध अब यह निर्विवाद सिद्ध कर चुकी है कि वनानुभव से ह्यूमन नेचुरल किलर सेल्स की क्रियात्मकता बढ़ने और इन्फ्लेमेशन कम होने सहित अनेक रास्तों के माध्यम से इम्म्यूनिटी भी बढ़ती है|
💫लगभग 5000 वर्ष पूर्व की बात है| आत्रेय के शिष्य अग्निवेश ने अपने गुरु से एक प्रश्न किया: “भगवन! देखने में आता है कि हितकारी आहार का उपयोग करते हुये भी कुछ लोग रोगी हो जाते हैं, जबकि अहितकारी आहार लेते हुये भी कुछ लोग निरोगी देखे जाते हैं। ऐसी स्थिति में क्या अच्छा है और क्या बुरा इसकी पहचान कैसे की जाये?” इस प्रश्न का जो उत्तर आत्रेय ने दिया, वह आज भी यथावत विज्ञान-संगत है।
💫आत्रेय का उत्तर था: “अग्निवेश! हितकारी आहार करने वाले लोगों में आहार के कारण होने वाले रोग उत्पन्न नहीं होते और हितकारी आहार लेने मात्र से समस्त रोगों का भय दूर नहीं हो जाता। हानिकारक भोजन के अलावा भी रोगों के तमाम कारण, जैसे ऋतुओं का विपरीत होना, प्रज्ञापराध या जानबूझकर गलती करना, शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध का अतियोग, मिथ्या योग एवं विषम योग आदि ऐसे कारण हैं जो उचित भोजन लेने के बावजूद भी मनुष्य को बीमार कर देते हैं। इसीलिये हितकारी आहार लेने वाले रोगी हो जाते देखे जाते हैं। हानिकारक आहार का उपयोग करने वालों में पथ्य, आहार, व शरीर की स्थिति में भिन्नता होने से हानिकारक आहार तुरन्त हानि नहीं पहुंचा पाते। सभी अपथ्य बराबर दोष वाले नहीं होते, न ही सभी दोष बराबर बलवान होते, और न सभी शरीर व्याधिक्षमत्व या रोग प्रतिरोधक क्षमता से संपन्न होते (न च सर्वाणि शरीराणि व्याधिक्षमत्वे समर्थानि भवन्ति| च.सू.28.7)। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि एक ही अपथ्य आहार जगह, समय, संयोग, वीर्य, व मात्रा की भिन्नता के कारण या ज्यादा खा लेने से और अधिक अपथ्य हो जाता है। वही दोष विविध कारणों से, विरुद्ध चिकित्सा वाला, धातुओं में पहुंचा हुआ, शरीर के प्राणायतनों में उत्पन्न, मर्म पर चोट करने वाला, अत्यंत कष्टदायी अतिशय जल्दी रोगों को उत्पन्न करने वाला होता है|” अंत में आत्रेय यह भी बताते हैं कि मूल रूप से शरीर की बनावट भी नैसर्गिक व्याधिक्षमत्व पर प्रभाव डालती है| “बहुत मोटे या बहुत दुबले लोग, रक्त, मांस, व अस्थियों के सुसंगठित न होने के कारण बेडौल शरीर वाले लोग, दुर्बल, अल्पसत्त्व या कमजोर मनोबल वाले लोगों में रोगों को सहने की क्षमता नहीं होती। जबकि इनके उलट लक्षणों वाले लोगों में रोगों को सहने की क्षमता होती है। इन अपथ्य आहारों, दोषों व शरीर की भिन्नता के कारण बीमारियाँ भी कम या ज्यादा, जल्दी या देर से उत्पन्न होती हैं।”
💫जिस व्यक्ति का सहज (इनेट) या युक्तिकृत (डेराइव्ड) व्याधिक्षमत्व मज़बूत है वह मुश्किल से ही बीमार पड़ता है। यदि बीमार पड़ भी जाये तो बीमारी अपना बल मुश्किल से ही दिखा पाती है| व्याधिक्षमत्व में दो शब्द निहित हैं, व्याधि एवं क्षमत्व| व्याधि का तात्पर्य शरीर की धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेदा, अस्थि, मज्जा, शुक्र) में विषमता उत्पन्न होना है| क्षमत्व से तात्पर्य इस विषमता को न होने देने की क्षमता है। मानसिक बीमारियों के सन्दर्भ में सत्त्व गुण जितना अधिक होगा, व्याधिक्षमत्व उतना ही बेहतर होगा| शरीर में सहज व्याधिक्षमत्व के सन्दर्भ में यह बात महत्वपूर्ण है कि शरीर में दुरुस्त मांसपेशियों, संरचना, स्वरुप व मज़बूत इन्द्रियों वाला व्यक्ति रोगों के बल से कभी प्रभावित नहीं होता| भूख, प्यास, ठंडी, गर्मी, व्यायाम को ठीक से सहन करने वाला, सम अग्नि वाला, बुढ़ापे की उम्र में ही बूढ़ा होने वाला, मांसपेशियों के सही चय वाला व्यक्ति ही स्वस्थ है (च.सू.21.18): सममांसप्रमाणस्तु समसंहननो नरः| दृढेन्द्रियो विकाराणां न बलेनाभिभूयते|| क्षुत्पिपासातपसहः शीतव्यायामसंसहः| समपक्ता समजरः सममांसचयो मतः||
आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भ में व्याधिक्षमत्व को इम्यूनिटी कहा जाता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र संक्रमण, बीमारी या अन्य अवांछित तत्वों के आक्रमण से बचने के लिये शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है। व्याधिक्षमत्व में कमी होने से शरीर इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज्ड स्थिति में आ जाता है| ऐसी स्थिति में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने से रोगजनन आसानी से होता है। इम्यूनिटी किसी व्यक्ति के शरीर में विशिष्ट एन्टीबॉडी या श्वेतरक्त कौशिकाओं की क्रिया से किसी विशेष संक्रमण, विषाक्त पदार्थ या हानिकारी जीवन-शैली से होने वाले रोगों का प्रतिरोध करने की क्षमता के रूप में समझा जाता है।
💫आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार इम्यूनिटी मूलतः दो प्रकार से समझी जा सकती है: इनेट (जन्मजात) और एडाप्टिव (अनुकूलनीय)। इनेट-इम्यूनिटी प्रतिरक्षा की पहली पंक्ति है जो पैथोजेन को मारने वाली कोशिकाओं जैसे न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज द्वारा संपादित की जाती है। किसी विषाणु का संक्रमण होने पर ये किलर-सेल्स तेज गति से सबसे पहले अपना काम करती हैं। एडाप्टिव- इम्यूनिटी की क्रियात्मकता तुलनात्मक रूप से धीमी होती है| इस तंत्र में टी-कोशिकाओं, बी-कोशिकाओं और एंटीबॉडी जैसी व्यवस्था है जो विशिष्ट रोगजनकों पर प्रतिक्रिया देता है। यह तंत्र इम्यून-मेमोरी के लिये भी उत्तरदायी है जो मानव में पहले हुई कुछ बीमारियों को पहचानता है और दुबारा नहीं होने देता। मेमोरी बी-सेल नामक कोशिकायें पैथोजेन को पहचानती हैं, और दुबारा संक्रमण होने पर त्वरित-प्रतिक्रिया करते हुये संक्रमण को निष्फल करने का काम करती हैं। हालाँकि नवीन शोध यह बताती है नेचुरल-किलर कोशिकायें भी एडाप्टिव-इम्यूनिटी प्रतिक्रिया का प्रदर्शन कर सकती हैं| जो भी हो, गड़बड़ तब होती है जब कुछ वायरस या माइक्रोब्स अपने पूर्व रूप से म्यूटेट या उत्परिवर्तित होकर इम्यून-मेमोरी (प्रतिरक्षा स्मृति) को गच्चा दे देते हैं।
💫व्याधिक्षमत्व को परिभाषित करते हुये चरकसंहिता के दिग्गज टीकाकार आचार्य चक्रपाणि ने लगभग 900 साल पहले लिखा (च.सू. 28.7 पर चक्रपाणि): व्याधिक्षमत्वं व्याधिबलविरोधित्वं व्याध्युत्पादप्रतिबन्धकत्वमिति यावत्| तात्पर्य यह है कि व्याधिबल की विरोधिता व व्याधि की उत्पत्ति में प्रतिबंधक होना व्याधिक्षमत्व है। अभिप्राय यह है कि शरीर में उत्पन्न बीमारी के बल या तीक्ष्णता को रोकने और बीमारी की उत्पत्ति को रोकने वाली क्षमता को व्याधिक्षमत्व कहा जाता है।
💫व्याधिक्षमत्व को बल, ओज और प्राकृत श्लेष्मा के रूप में भी जाना जाता है| बल वह शक्ति है जिसके द्वारा शरीर विभिन्न चेष्टाओं से कार्य संपन्न करता है। इस कार्योत्पादक शक्ति को व्यायाम-शक्ति से जाना देखा जाता है। बल के तीन प्रकार हैं (च.सू.11.36): त्रिविधं बलमिति- सहजं, कालजं, युक्तिकृतं च| सहजं यच्छरीरसत्त्वयोः प्राकृतं, कालकृतमृतुविभागजं वयःकृतं च, युक्तिकृतं पुनस्तद्यदाहारचेष्टायोगजम्| बल तीन प्रकार के होते हैं| सहज बल शरीर और मन पर आधारित होता है| उम्र के साथ शरीर की वृद्धि से प्राप्त बल को कालज बल कहा जाता है| खान-पान, जीवन-शैली और व्यायाम आदि की युक्ति से प्राप्त बल को युक्तिकृत बल कहा जाता है| रोग से रक्षा करने वाले को बल कहा जाता है। व्याधिक्षमत्व को ओज और ओज को बल के रूप में भी समझा जाता है (सु.सू.15.19) रसादीनां शुक्रान्तानां धातूनां यत् परं तेजस्तत् खल्वोजस्तदेव बलमित्युच्यते स्वशास्त्रसिद्धान्तात्। रसादिक तथा शुक्रान्त धातुओं के उत्कृष्ट सार भाग को ओज कहते हैं तथा आयुर्वेद के अनुसार उसी का दूसरा नाम बल है| यही बल व्याधियों से शरीर की रक्षा करता है। यहाँ एक बात समझना आवश्यक है ओज और बल हालाँकि एक कहे गये हैं किन्तु ओज को कारण और बल को कार्य माना जाता है| ओज का रूप, रस और वर्ण होने से द्रव्य है जबकि बल इसका कार्य है| यहाँ व्याधिक्षमत्व के सन्दर्भ में बल (कार्य) और कारण (ओज) को एक मान लिया जाता है| इसी सन्दर्भ में प्राकृत कफ को बल या व्याधिक्षमत्व का कारण माना जाता है (च.सू.17.117): प्राकृतस्तु बलं श्लेष्मा विकृतो मल उच्यते। स चैवौजः स्मृतः काये स च पाप्मोपदिश्यते।। यही कारण है कि कफज प्रकृति में उत्तम बल, पित्तज प्रकृति के व्यक्तियों में मध्यम बल तथा वातज प्रकृति के व्यक्तियों में अवर बल होता है।
💫इस प्रकार व्याधिक्षमत्व का तात्पर्य व्याधि-बल का विरोध शरीरगत बल द्वारा किया जाता है। व्याधिक्षमत्व को प्रभावित करने वाले विभिन्न भावों को दशविधि रोगी परीक्षा के भावों में भी देखा जाता है| उदहारण के लिये व्यक्ति की मूल प्रकृति का बल से सीधा सम्बन्ध होता है। सबसे उत्तम सम प्रकृति (वात-पित्त-कफज) है, परन्तु किसी जनसंख्या में समप्रकृति वाले बहुत कम होते हैं। अतः व्यवहार में कफ प्रकृति वालों को बेहतर बल वाला माना जाता है| इसके साथ ही सार भी बल को प्रभावित करता है| सारयुक्त से तात्पर्य यह है कि व्यक्ति में साररूप धातुओं का नियमित निर्माण होता है। सार धातुओं के सम्यक प्रकार से उत्पन्न होते रहने पर शरीर में व्याधिक्षमत्व बढ़िया बना रहता है। जैसा कि पूर्व में चर्चा की गयी है, बल का मुख्य कारक ओज है जो सभी धातुओं का सार है| साररूप में यह सभी धातुओं में व्याप्त होकर धातुओं की रक्षा करता है। व्याधिक्षमत्व को प्रभावित करने वाले अन्य भावों में सात्म्य, सत्त्व, अग्नि, शारीरिक-शक्ति व वय हैं। अग्निबल को आहार करने की क्षमता से परखा जा सकता है| आहार-शक्ति (आहार की मात्रा) अग्निबल पर आश्रित है। यदि व्यक्ति की आहार शक्ति मज़बूत है तो भोजन का पाचन और धातुओं की पुष्टि यथोचित होने से शरीर मज़बूत रहता है। व्यायाम-शक्ति या शारीरिक रूप से श्रम करने की शक्ति भी बल का संकेतक है। व्यक्ति की वय या उम्र का भी बल से संबंध होता है। युवावस्था में उत्तम बल और जरा या बुढ़ापा आने पर बल कम रहता है।
💫व्याधिक्षमत्व बढ़ाने के लिये बल व ओज की वृद्धि में सहायक द्रव्यों और क्रियाओं का इस प्रकार युक्तिपूर्वक नियमित सेवन करना चाहिये, जिससे व्याधिक्षमत्व का संरक्षण व वृद्धि हो किन्तु प्रकृति, अग्नि, धातुओं व मलक्रिया का समत्व तथा आत्मा, इन्द्रियों व मन की प्रसन्नता यथावत बनी रहे| संक्षेप में व्याधिक्षमत्व बढ़ाने के लिये सात रक्षा-दीवारों की निरंतर और सम्यक सार-सम्हाल करना आवश्यक है| इनमें आहार या खानपान, विहार या जीवनशैली, स्वस्थवृत्त या व्यक्तिगत स्वास्थ्य विषयक क्रियायें, सद्वृत्त या व्यक्तिगत सदाचरण, पंचकर्म या शारीरिक विषाक्तता को बाहर करने के लिये आयुर्वेद की पांच प्रक्रियायें, रसायन या उम्र-आधारित रोगजनन को रोकने हेतु कायाकल्प उपाय, और अंततः औषधि या चिकित्सा शामिल हैं। परन्तु वनानुभव इन सबसे ऊपर है। प्रति सप्ताह कम से कम 168 मिनट वनों, उपवनों और हरियाली में बिताइये| यहाँ एक साथ वनवास की बात नहीं है बल्कि प्रतिदिन वनानुभव लीजिये। इससे इम्म्यूनिटी बढ़ने के साथ प्रसन्नता, आत्म-सम्मान, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में धनात्मक सुधार होगा। यह शास्त्र-सिद्ध, शोध-सिद्ध और स्वानुभूत है।
आलेख –
डॉ अनुपम आदित्य मिश्र
एम डी
सीवान
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होटल सफायर इन में शारदीय नवरात्र पर हुआ फलाहार का आयोजन,पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय सहित कई गणमान्य लोग हुए शामिल
- फलाहार के बहाने सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ;- शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर होटल सफायर इन में शनिवार को फलाहार कार्यक्रम आयोजित किया गया।आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली।सदर विधायक एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय,गोरियाकोठी विधायक देवेशकांत सिंह,दरौंदा विधायक कर्णजीत सिंह,भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय पांडेय,आइएमए के सचिव एवं सिवान योग संघ के अध्यक्ष डॉ शरद चौधरी,दयानन्द आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के शासी निकाय के सलाहकार एवं पूर्व प्राचार्य डॉ प्रजापति त्रिपाठी,जदयू जिलाध्यक्ष विकाश सिंह उर्फ़ जिशू सिंह तथा डॉ रुपेश कुमार सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और माँ दुर्गा के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।आयोजन में राजनीतिक, सामाजिक और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और सनातन संस्कृति की परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया.पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अपने संदेश में कहा कि शारदीय नवरात्र आस्था, शक्ति और संस्कारों का पावन पर्व है. इस अवसर पर होने वाले फलाहार कार्यक्रम धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ समाज में आपसी सद्भाव और एकजुटता का संदेश देते हैं. उन्होंने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की तथा प्रदेशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं.आयोजक रुपेश कुमार ने कहा कि फलाहार कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य धार्मिक जागरूकता बढ़ाने के साथ सामाजिक एकता को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में युवा पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना जरूरी है. ऐसे आयोजन युवाओं को सनातन धर्म की परंपराओं, संस्कारों और उसके मूल संदेशों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक उपदेश देना नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक एकता और आपसी सद्भाव को प्रोत्साहित करना भी है.


भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजय कुमार पांडे ने कहा कि हर वर्ष शारदीय नवरात्र में फलाहार कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. ऐसे आयोजन आस्था और परंपराओं को मजबूत करने के साथ समाज में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा जारी रहेगी. उन्होंने मां दुर्गा से सभी पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की.


कार्यक्रम में समाजसेवी सुभाष प्रसाद सोनी, लोक अभियोजक प्रमिल कुमार गोप,दयानन्द आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सुधांशु शेखर त्रिपाठी,डॉ धीरेन कुमार,नगर परिषद की उपसभापति किरण गुप्ता, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष लीलावती गिरि,प्रदेश मंत्री मुकेश कुमार सिंह कुशवाहा, नगर परिषद की पूर्व सभापति अनुराधा गुप्ता, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अभिमन्यु कुमार सिंह, डॉ राजा प्रसाद, जादूगर विजय, प्रेम शंकर सिंह, डॉ सौरभ सिंह, डॉ ऋचा सिंह,हरेंद्र सिंह कुशवाहा और धनंजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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भारत गौरव देश रत्न राजेंद्र मेमोरियल फाउंडेशन ने विश्व स्वक्षता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर स्वक्षता अभियान से जुड़ने का किया आह्वान
लोकतंत्र न्यूज,सिवान;- विश्व छात्र दिवस ,विश्व हस्त प्रक्षालन दिवस एवं विश्व ग्रामीण महिला दिवस के संयुक्त अवसर पर गुरुवार को भारत गौरव देश रत्न राजेंद्र मेमोरियल फाउंडेशन के सौजन्य से वी.एम. हाई स्कूल मैदान में हस्त प्रक्षालन कार्यकम आयोजित किया गया।जिसमें बच्चों ने मंच से हाथ धुलाई कार्यक्रम का डेमो दिखाकर उपस्थित सभी बच्चों को तथा आमंत्रित अतिथि गणों को इस स्वच्छता अभियान से जुड़ने हेतु जागरूक किया।फाउंडेशन के महासचिव इंजीनियर प्रमोद कुमार मल्ल ने अतिथियों का स्वागत करने के साथ संस्था परिचय, कार्यक्रम उद्देश्य बताते हुए कहा कि आज सामूहिक हैंडवॉश कार्यक्रम छात्रों द्वारा फाउंडेशन के संयोजन में देश के विभिन्न विद्यालयों एवं स्थलों पर भी निर्धारित समय पूर्वाहन 11:11 बजे दिन में हो रहे हैं और 5.30 लाख से ऊपर विद्यार्थी अभी तक इस अभियान से जुड़ चुके हैं।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाने-माने नेत्र चिकित्सक और आई.एम.ए.सिवान के सचिव डॉ शरद चौधरी ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।तत्पश्चात माँ सरस्वती,डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी के तैल चित्र पर मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों ने पुष्पांजलि अर्पित किया।

उक्त कार्यक्रम में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी पर आयोजित सिवान के एक दर्जन से ऊपर विद्यालय में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विजेता हुए छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट वक्ता सम्मान से सम्मानित किया गया।इसके पहले अतिथियों को संस्था की तरफ से स्मृति चिन्ह,अंग वस्त्र एवं पौधा देकर सम्मानित किया गया।उक्त अवसर पर अलग-अलग विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षिकाओं सहित वीएम.एच.ई के एक दर्जन से ऊपर शिक्षक शिक्षिकाओं को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया।बच्चों ने अपनी मधुर वाणी में भाषण देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।संस्था के महासचिव इंजीनियर प्रमोद कुमार मल्ल ने अपने संबोधन में कहा कि, “यह कार्यक्रम डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एवं डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को समर्पित है,समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा। खासकर देश का भविष्य छात्र-छात्राओं के लिए इस प्रकार के स्वच्छता एवं शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाला कार्यक्रम हमेशा आयोजित किया जाएगा”। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉक्टर अरविंद आनंद ने कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए समा बांध दिया।मौके पर छात्र छात्रों ने स्वागत गीत गाकर तथा वी.एम.एच.ई के संगीत शिक्षक ने बांसुरी वादन से सभी का मन मोह लिया।उक्त कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वी.एम.एच.ई के प्रधानाध्यापक राकेश कुमार सिंह,विशिष्ट अतिथि अभिमन्यु सिंह,पूर्व सांसद ओम प्रकाश यादव,मार्शल एजेंसी के निदेशक पारस नाथ पंडित,देव भोग के प्रतिनिधि वीर कुंवर सिंह, रामेश्वर सिंह जीरादेई,गजानन पांडेय,उमेश मल्ल, संस्कार भारती के संरक्षक जादूगर विजय जी,राम प्रेम शंकर सिंह,पत्रकार सचिन पर्वत,बालाजी पाण्डेय,चंद्रमोहन सिंह, राम इकबाल सिंह,रामदेव राम,उपेंद्र पांडेय उपस्थित रहे।
देश
दीपों की रोशनी में सजेगा सीवान, दीपोत्सव में काव्य और कला का होगा संगम
कलश, दीप पेंटिंग व रंगोली प्रतियोगिता में प्रतिभागी दिखायेंगे रचनात्मक प्रतिभा
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ;- दीपों का पर्व दीपावली की आभा को कला,साहित्य और संस्कृति से जोड़ते हुए संस्कार भारती, सीवान की ओर से आगामी 04 नवंबर को दीपोत्सव-2026 का भव्य आयोजन किया जायेगा. कार्यक्रम शिव मंदिर (अग्रवाल जी), पुलिया घाट, कागजी मोहल्ला, सीवान में दोपहर तीन बजे से शुरू होगा. आयोजन में दीपोत्सव के साथ काव्य पाठ और विभिन्न कला प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी।संस्कार भारती की ओर से आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभागियों को अपनी कला और रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा. कार्यक्रम के तहत कलश पेंटिंग, दीप पेंटिंग और रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी. प्रतिभागी अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल के माध्यम से दीपावली की संस्कृति, परंपरा और उल्लास को रंगों में उकेरेंगे. वहीं, काव्य पाठ के दौरान साहित्य प्रेमी अपनी रचनाओं के माध्यम से दीपोत्सव के भाव और भारतीय संस्कृति की विविध छटाओं को प्रस्तुत करेंगे.आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में सहभागिता के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है. आयोजन का उद्देश्य कला, साहित्य और संस्कृति के प्रति लोगों, विशेषकर युवाओं और बच्चों में रुचि बढ़ाना तथा स्थानीय प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना है.संस्कार भारती, सीवान ने जिले के कला एवं साहित्य प्रेमियों, बच्चों, युवाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है. आयोजकों का कहना है कि दीपों के पर्व को रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना से जोड़कर मनाने का यह प्रयास शहर में उत्सव के साथ कला का माहौल भी तैयार करेगा।अध्यक्ष राम प्रेम शंकर सिंह की अध्यक्षता में सिवान इकाई की बैठक रविवार को कलावती मैरिज हॉल में आयोजित की गई जिसमें अर्पित कुमार सिंह को कार्यक्रम के संयोजक के रूप में चयन की घोषणा जादूगर विजय जी ने किया। आयोजन को सफल एवं सुंदर बनाने के लिए निम्न सदस्यों को विभिन्न दायित्व दिए गए बृजमोहन प्रसाद,अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ,सुनील कुमार ,लव कुमार साहू ,डॉक्टर राकेश कुमार तिवारी ,भगवान दास, ओम प्रकाश शर्मा ,प्रतिमा साहू ,सरोज सोनी ,अंजनी पांडे ,प्रेमकांत यादव ,धनंजय मिश्रा, धीरज श्रीवास्तव, राजेश सोनी ,राजेश पांडे,नंदकुमार द्विवेदी, डॉ विपुल कुमार ,सत्यम कुमार, कृष्ण कुमार गुप्ता ,विकास शाह,साक्षी सोनी।

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