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व्याधिक्षमत्व बढ़ाने के लिये 168 मिनट प्रति सप्ताह वनानुभव लीजिये- डॉ अनुपम आदित्य मिश्र, एम डी
💫प्राचीन भारत के महर्षि-वैज्ञानिक पुनर्वसु आत्रेय को चिकित्सा व स्वास्थ्य-रक्षण के एक ऐसे सिद्धांत का जनक माना जाता है जिसे आज वनानुभव और प्रकृति-अनुभव (फ़ॉरेस्ट -एक्सपीरियंस, नेचर-एक्सपीरियंस) आदि नामों से जाना जाता है| स्वास्थ्य-रक्षण और रोगोपचार में प्राकृतिक स्थलों की भूमिका का आयुर्वेद में कम से कम 1000 साल ईसा पूर्व से वर्णन प्राप्त होता है| हाल ही में हुई शोध अब यह निर्विवाद सिद्ध करती है कि प्रकृति का सानिध्य हमारे संज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक, शारीरिक, मानसिक और बायोफिज़ियोलॉजिकल स्वास्थ्य में सुधार करता है| परन्तु सबसे बड़ी बात यह है कि वर्ष 2022 तक की शोध अब यह निर्विवाद सिद्ध कर चुकी है कि वनानुभव से ह्यूमन नेचुरल किलर सेल्स की क्रियात्मकता बढ़ने और इन्फ्लेमेशन कम होने सहित अनेक रास्तों के माध्यम से इम्म्यूनिटी भी बढ़ती है|
💫लगभग 5000 वर्ष पूर्व की बात है| आत्रेय के शिष्य अग्निवेश ने अपने गुरु से एक प्रश्न किया: “भगवन! देखने में आता है कि हितकारी आहार का उपयोग करते हुये भी कुछ लोग रोगी हो जाते हैं, जबकि अहितकारी आहार लेते हुये भी कुछ लोग निरोगी देखे जाते हैं। ऐसी स्थिति में क्या अच्छा है और क्या बुरा इसकी पहचान कैसे की जाये?” इस प्रश्न का जो उत्तर आत्रेय ने दिया, वह आज भी यथावत विज्ञान-संगत है।
💫आत्रेय का उत्तर था: “अग्निवेश! हितकारी आहार करने वाले लोगों में आहार के कारण होने वाले रोग उत्पन्न नहीं होते और हितकारी आहार लेने मात्र से समस्त रोगों का भय दूर नहीं हो जाता। हानिकारक भोजन के अलावा भी रोगों के तमाम कारण, जैसे ऋतुओं का विपरीत होना, प्रज्ञापराध या जानबूझकर गलती करना, शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध का अतियोग, मिथ्या योग एवं विषम योग आदि ऐसे कारण हैं जो उचित भोजन लेने के बावजूद भी मनुष्य को बीमार कर देते हैं। इसीलिये हितकारी आहार लेने वाले रोगी हो जाते देखे जाते हैं। हानिकारक आहार का उपयोग करने वालों में पथ्य, आहार, व शरीर की स्थिति में भिन्नता होने से हानिकारक आहार तुरन्त हानि नहीं पहुंचा पाते। सभी अपथ्य बराबर दोष वाले नहीं होते, न ही सभी दोष बराबर बलवान होते, और न सभी शरीर व्याधिक्षमत्व या रोग प्रतिरोधक क्षमता से संपन्न होते (न च सर्वाणि शरीराणि व्याधिक्षमत्वे समर्थानि भवन्ति| च.सू.28.7)। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि एक ही अपथ्य आहार जगह, समय, संयोग, वीर्य, व मात्रा की भिन्नता के कारण या ज्यादा खा लेने से और अधिक अपथ्य हो जाता है। वही दोष विविध कारणों से, विरुद्ध चिकित्सा वाला, धातुओं में पहुंचा हुआ, शरीर के प्राणायतनों में उत्पन्न, मर्म पर चोट करने वाला, अत्यंत कष्टदायी अतिशय जल्दी रोगों को उत्पन्न करने वाला होता है|” अंत में आत्रेय यह भी बताते हैं कि मूल रूप से शरीर की बनावट भी नैसर्गिक व्याधिक्षमत्व पर प्रभाव डालती है| “बहुत मोटे या बहुत दुबले लोग, रक्त, मांस, व अस्थियों के सुसंगठित न होने के कारण बेडौल शरीर वाले लोग, दुर्बल, अल्पसत्त्व या कमजोर मनोबल वाले लोगों में रोगों को सहने की क्षमता नहीं होती। जबकि इनके उलट लक्षणों वाले लोगों में रोगों को सहने की क्षमता होती है। इन अपथ्य आहारों, दोषों व शरीर की भिन्नता के कारण बीमारियाँ भी कम या ज्यादा, जल्दी या देर से उत्पन्न होती हैं।”
💫जिस व्यक्ति का सहज (इनेट) या युक्तिकृत (डेराइव्ड) व्याधिक्षमत्व मज़बूत है वह मुश्किल से ही बीमार पड़ता है। यदि बीमार पड़ भी जाये तो बीमारी अपना बल मुश्किल से ही दिखा पाती है| व्याधिक्षमत्व में दो शब्द निहित हैं, व्याधि एवं क्षमत्व| व्याधि का तात्पर्य शरीर की धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेदा, अस्थि, मज्जा, शुक्र) में विषमता उत्पन्न होना है| क्षमत्व से तात्पर्य इस विषमता को न होने देने की क्षमता है। मानसिक बीमारियों के सन्दर्भ में सत्त्व गुण जितना अधिक होगा, व्याधिक्षमत्व उतना ही बेहतर होगा| शरीर में सहज व्याधिक्षमत्व के सन्दर्भ में यह बात महत्वपूर्ण है कि शरीर में दुरुस्त मांसपेशियों, संरचना, स्वरुप व मज़बूत इन्द्रियों वाला व्यक्ति रोगों के बल से कभी प्रभावित नहीं होता| भूख, प्यास, ठंडी, गर्मी, व्यायाम को ठीक से सहन करने वाला, सम अग्नि वाला, बुढ़ापे की उम्र में ही बूढ़ा होने वाला, मांसपेशियों के सही चय वाला व्यक्ति ही स्वस्थ है (च.सू.21.18): सममांसप्रमाणस्तु समसंहननो नरः| दृढेन्द्रियो विकाराणां न बलेनाभिभूयते|| क्षुत्पिपासातपसहः शीतव्यायामसंसहः| समपक्ता समजरः सममांसचयो मतः||
आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भ में व्याधिक्षमत्व को इम्यूनिटी कहा जाता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र संक्रमण, बीमारी या अन्य अवांछित तत्वों के आक्रमण से बचने के लिये शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है। व्याधिक्षमत्व में कमी होने से शरीर इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज्ड स्थिति में आ जाता है| ऐसी स्थिति में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने से रोगजनन आसानी से होता है। इम्यूनिटी किसी व्यक्ति के शरीर में विशिष्ट एन्टीबॉडी या श्वेतरक्त कौशिकाओं की क्रिया से किसी विशेष संक्रमण, विषाक्त पदार्थ या हानिकारी जीवन-शैली से होने वाले रोगों का प्रतिरोध करने की क्षमता के रूप में समझा जाता है।
💫आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार इम्यूनिटी मूलतः दो प्रकार से समझी जा सकती है: इनेट (जन्मजात) और एडाप्टिव (अनुकूलनीय)। इनेट-इम्यूनिटी प्रतिरक्षा की पहली पंक्ति है जो पैथोजेन को मारने वाली कोशिकाओं जैसे न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज द्वारा संपादित की जाती है। किसी विषाणु का संक्रमण होने पर ये किलर-सेल्स तेज गति से सबसे पहले अपना काम करती हैं। एडाप्टिव- इम्यूनिटी की क्रियात्मकता तुलनात्मक रूप से धीमी होती है| इस तंत्र में टी-कोशिकाओं, बी-कोशिकाओं और एंटीबॉडी जैसी व्यवस्था है जो विशिष्ट रोगजनकों पर प्रतिक्रिया देता है। यह तंत्र इम्यून-मेमोरी के लिये भी उत्तरदायी है जो मानव में पहले हुई कुछ बीमारियों को पहचानता है और दुबारा नहीं होने देता। मेमोरी बी-सेल नामक कोशिकायें पैथोजेन को पहचानती हैं, और दुबारा संक्रमण होने पर त्वरित-प्रतिक्रिया करते हुये संक्रमण को निष्फल करने का काम करती हैं। हालाँकि नवीन शोध यह बताती है नेचुरल-किलर कोशिकायें भी एडाप्टिव-इम्यूनिटी प्रतिक्रिया का प्रदर्शन कर सकती हैं| जो भी हो, गड़बड़ तब होती है जब कुछ वायरस या माइक्रोब्स अपने पूर्व रूप से म्यूटेट या उत्परिवर्तित होकर इम्यून-मेमोरी (प्रतिरक्षा स्मृति) को गच्चा दे देते हैं।
💫व्याधिक्षमत्व को परिभाषित करते हुये चरकसंहिता के दिग्गज टीकाकार आचार्य चक्रपाणि ने लगभग 900 साल पहले लिखा (च.सू. 28.7 पर चक्रपाणि): व्याधिक्षमत्वं व्याधिबलविरोधित्वं व्याध्युत्पादप्रतिबन्धकत्वमिति यावत्| तात्पर्य यह है कि व्याधिबल की विरोधिता व व्याधि की उत्पत्ति में प्रतिबंधक होना व्याधिक्षमत्व है। अभिप्राय यह है कि शरीर में उत्पन्न बीमारी के बल या तीक्ष्णता को रोकने और बीमारी की उत्पत्ति को रोकने वाली क्षमता को व्याधिक्षमत्व कहा जाता है।
💫व्याधिक्षमत्व को बल, ओज और प्राकृत श्लेष्मा के रूप में भी जाना जाता है| बल वह शक्ति है जिसके द्वारा शरीर विभिन्न चेष्टाओं से कार्य संपन्न करता है। इस कार्योत्पादक शक्ति को व्यायाम-शक्ति से जाना देखा जाता है। बल के तीन प्रकार हैं (च.सू.11.36): त्रिविधं बलमिति- सहजं, कालजं, युक्तिकृतं च| सहजं यच्छरीरसत्त्वयोः प्राकृतं, कालकृतमृतुविभागजं वयःकृतं च, युक्तिकृतं पुनस्तद्यदाहारचेष्टायोगजम्| बल तीन प्रकार के होते हैं| सहज बल शरीर और मन पर आधारित होता है| उम्र के साथ शरीर की वृद्धि से प्राप्त बल को कालज बल कहा जाता है| खान-पान, जीवन-शैली और व्यायाम आदि की युक्ति से प्राप्त बल को युक्तिकृत बल कहा जाता है| रोग से रक्षा करने वाले को बल कहा जाता है। व्याधिक्षमत्व को ओज और ओज को बल के रूप में भी समझा जाता है (सु.सू.15.19) रसादीनां शुक्रान्तानां धातूनां यत् परं तेजस्तत् खल्वोजस्तदेव बलमित्युच्यते स्वशास्त्रसिद्धान्तात्। रसादिक तथा शुक्रान्त धातुओं के उत्कृष्ट सार भाग को ओज कहते हैं तथा आयुर्वेद के अनुसार उसी का दूसरा नाम बल है| यही बल व्याधियों से शरीर की रक्षा करता है। यहाँ एक बात समझना आवश्यक है ओज और बल हालाँकि एक कहे गये हैं किन्तु ओज को कारण और बल को कार्य माना जाता है| ओज का रूप, रस और वर्ण होने से द्रव्य है जबकि बल इसका कार्य है| यहाँ व्याधिक्षमत्व के सन्दर्भ में बल (कार्य) और कारण (ओज) को एक मान लिया जाता है| इसी सन्दर्भ में प्राकृत कफ को बल या व्याधिक्षमत्व का कारण माना जाता है (च.सू.17.117): प्राकृतस्तु बलं श्लेष्मा विकृतो मल उच्यते। स चैवौजः स्मृतः काये स च पाप्मोपदिश्यते।। यही कारण है कि कफज प्रकृति में उत्तम बल, पित्तज प्रकृति के व्यक्तियों में मध्यम बल तथा वातज प्रकृति के व्यक्तियों में अवर बल होता है।
💫इस प्रकार व्याधिक्षमत्व का तात्पर्य व्याधि-बल का विरोध शरीरगत बल द्वारा किया जाता है। व्याधिक्षमत्व को प्रभावित करने वाले विभिन्न भावों को दशविधि रोगी परीक्षा के भावों में भी देखा जाता है| उदहारण के लिये व्यक्ति की मूल प्रकृति का बल से सीधा सम्बन्ध होता है। सबसे उत्तम सम प्रकृति (वात-पित्त-कफज) है, परन्तु किसी जनसंख्या में समप्रकृति वाले बहुत कम होते हैं। अतः व्यवहार में कफ प्रकृति वालों को बेहतर बल वाला माना जाता है| इसके साथ ही सार भी बल को प्रभावित करता है| सारयुक्त से तात्पर्य यह है कि व्यक्ति में साररूप धातुओं का नियमित निर्माण होता है। सार धातुओं के सम्यक प्रकार से उत्पन्न होते रहने पर शरीर में व्याधिक्षमत्व बढ़िया बना रहता है। जैसा कि पूर्व में चर्चा की गयी है, बल का मुख्य कारक ओज है जो सभी धातुओं का सार है| साररूप में यह सभी धातुओं में व्याप्त होकर धातुओं की रक्षा करता है। व्याधिक्षमत्व को प्रभावित करने वाले अन्य भावों में सात्म्य, सत्त्व, अग्नि, शारीरिक-शक्ति व वय हैं। अग्निबल को आहार करने की क्षमता से परखा जा सकता है| आहार-शक्ति (आहार की मात्रा) अग्निबल पर आश्रित है। यदि व्यक्ति की आहार शक्ति मज़बूत है तो भोजन का पाचन और धातुओं की पुष्टि यथोचित होने से शरीर मज़बूत रहता है। व्यायाम-शक्ति या शारीरिक रूप से श्रम करने की शक्ति भी बल का संकेतक है। व्यक्ति की वय या उम्र का भी बल से संबंध होता है। युवावस्था में उत्तम बल और जरा या बुढ़ापा आने पर बल कम रहता है।
💫व्याधिक्षमत्व बढ़ाने के लिये बल व ओज की वृद्धि में सहायक द्रव्यों और क्रियाओं का इस प्रकार युक्तिपूर्वक नियमित सेवन करना चाहिये, जिससे व्याधिक्षमत्व का संरक्षण व वृद्धि हो किन्तु प्रकृति, अग्नि, धातुओं व मलक्रिया का समत्व तथा आत्मा, इन्द्रियों व मन की प्रसन्नता यथावत बनी रहे| संक्षेप में व्याधिक्षमत्व बढ़ाने के लिये सात रक्षा-दीवारों की निरंतर और सम्यक सार-सम्हाल करना आवश्यक है| इनमें आहार या खानपान, विहार या जीवनशैली, स्वस्थवृत्त या व्यक्तिगत स्वास्थ्य विषयक क्रियायें, सद्वृत्त या व्यक्तिगत सदाचरण, पंचकर्म या शारीरिक विषाक्तता को बाहर करने के लिये आयुर्वेद की पांच प्रक्रियायें, रसायन या उम्र-आधारित रोगजनन को रोकने हेतु कायाकल्प उपाय, और अंततः औषधि या चिकित्सा शामिल हैं। परन्तु वनानुभव इन सबसे ऊपर है। प्रति सप्ताह कम से कम 168 मिनट वनों, उपवनों और हरियाली में बिताइये| यहाँ एक साथ वनवास की बात नहीं है बल्कि प्रतिदिन वनानुभव लीजिये। इससे इम्म्यूनिटी बढ़ने के साथ प्रसन्नता, आत्म-सम्मान, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में धनात्मक सुधार होगा। यह शास्त्र-सिद्ध, शोध-सिद्ध और स्वानुभूत है।
आलेख –
डॉ अनुपम आदित्य मिश्र
एम डी
सीवान
Politics
नारी शक्ति के खिलाफ साजिश पर विधायक छोटी कुमारी का प्रेस कॉन्फ्रेंस,विपक्ष पर साधा निशाना
लोकतंत्र न्यूज,सिवान;- नारी सशक्तिकरण से जुड़े विधेयक को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है।इसी क्रम में छपरा की विधायक छोटी कुमारी ने बुधवार को परिसदन सिवान में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर तीखा हमला बोला।विधायक छोटी कुमारी ने कहा कि 17 अप्रैल का दिन देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सकता था, लेकिन विपक्ष की साजिश के चलते यह एक काले अध्याय के रूप में सामने आया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह केवल एक विधेयक की हार नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं पर सीधा आघात है।उन्होंने कहा कि संसद में जो कुछ हुआ, वह केवल एक विधेयक की हार नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के सपनों पर प्रहार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने राजनीतिक स्वार्थ में महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय को रोकने का काम किया। साथ ही विपक्ष की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों जैसे गंभीर विषय पर राजनीति करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।विधायक ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित अन्य दलों का महिलाओं के प्रति रवैया हमेशा से नकारात्मक रहा है। वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन उन्हें वास्तविक अधिकार देने की गंभीर कोशिश नहीं की गई।प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विपक्ष द्वारा OBC महिलाओं के नाम पर दिए जा रहे तर्कों को खारिज करते हुए इसे “सिर्फ बहाना” बताया। इस दौरान दरौंडा के विधायक कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैलाकर महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को कमजोर करना चाहता है।उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य महिलाओं का “हिस्सा छीनना” नहीं बल्कि “हिस्सा बढ़ाना” था, लेकिन विपक्ष ने इसे तोड़-मरोड़कर पेश कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने जानबूझकर इस मुद्दे को भटकाने का प्रयास किया।विधायक छोटी कुमारी ने विपक्ष पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि सामान्य परिवारों की महिलाएं आगे बढ़ें और संसद तक पहुंचें, क्योंकि इससे उनके राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती मिलती है। उन्होंने परिवारवाद को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं और आने वाले चुनावों में इसका जवाब जरूर देंगी।यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों का सवाल है।अंत में उन्होंने कहा कि विपक्ष ने केवल एक विधेयक को नहीं रोका, बल्कि देश की महिलाओं के विश्वास को ठेस पहुंचाई है, जिसका परिणाम उन्हें भविष्य में भुगतना पड़ेगा।उन्होंने कहा कि जनता समय आने पर इसका उचित जवाब देगी।इस मौके पर हरेंद्र कुशवाहा, सत्यम सिंह, सोनू, देवेंद्र गुप्ता, सुनीता जैयसवाल, पूनम गिरि, आभा देवी, सौम्या सोनी, दीपू सिंह, अलका गुप्ता, सौरभ कुशवाहा, नितीश कुशवाहा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

देश
सेवा भावना,निर्भीकता और सामाजिकता के प्रतीक डॉक्टर त्रिभुवन नारायण सिंह को दी गई श्रद्धांजलि
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ;- प्रसिद्ध चिकित्सक स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय निदेशक,सारण एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संयोजक,विश्व हिन्दू परिषद के भूतपूर्व जिला अध्यक्ष,भारत विकास परिषद के पहले जिलाध्यक्ष,आरोग्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभिन्न अनुसांगिक संगठनों में विभिन्न दायित्यों का निर्वहन करते हुए कोरोना संक्रमण से 2020 में अंतिम सांस लेने वाले स्वर्गीय डॉक्टर त्रिभुवन नारायण सिंह की पावन स्मृति पर नगर के चिकित्सकों,समाजसेवीयों एवं पत्रकारों सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजनों ने उनकी पुण्यतिथि पर मंगलवार को नमन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

डॉक्टर त्रिभुवन नारायण सिंह का व्यक्तित्व और कृतित्व सकारात्मक प्रेरणा के संदेश का संचार करता है।उनकी स्पष्टता, निर्भीकता, सेवा भावना, कर्मठता, अनुशासन के प्रति संजीदगी, सांस्कृतिक अनुराग, आत्मीयतापूर्ण सामाजिकता उन्हें एक विशेष प्रतिष्ठा प्रदान करती है।।स्वास्थ्य विभाग में सिविल सर्जन तथा अन्य उच्चतर दायित्वों का निर्वहन उन्होंने बेहद संवेदनशीलता के साथ किया। साथ ही समाज के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन उन्होंने बेहद गंभीरता और समर्पित भाव से किया लेकिन दहशत के दौर में भी कभी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। सदियों तक उनका व्यक्तित्व समाज को सकारात्मक मार्गदर्शन देता रहेगा। ये बातें मंगलवार को टी एन मेमोरियल हॉस्पिटल पर डॉक्टर त्रिभुवन नारायण सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नगर के गणमान्यजनों ने कही। मौके पर अपने पिता को बेहद भावुक अंदाज में अश्रुपूरित आंखों से याद करते हुए डॉक्टर ऋचा सिंह ने कहा कि, “पापा की कर्मठता और उनका अनुशासन के प्रति लगाव हमारा सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने कोरोना काल में अपने अंतिम समय तक पीड़ित मानवता के चिकित्सकीय सहायता का दायित्व निभाया। अपने पिता को याद करते हुए प्रसिद्ध पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सिंह ने कहा कि पापा के जीवन मूल्य हमारा सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनके व्यक्तित्व की सहजता, सरलता और मधुरता हमें सदैव उनकी याद दिलाती रहती है।इस अवसर पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए बीस सूत्री के उपाध्यक्ष संजय पांडेय ने उन्हें निर्भीकता की मिसाल बताया।वहीं दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर सुधांशु शेखर त्रिपाठी ने उनके माधुर्यपूर्ण व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
शिक्षाविद् डॉक्टर गणेश दत्त पाठक ने कहा कि डॉक्टर साहब का जीवंत व्यक्तित्व और उनका सांस्कृतिक अनुराग अदभुत था।भारत विकास परिषद् के अध्यक्ष रोहित सिंह ने कहा कि दहशत के दौर में डॉक्टर साहब पर ढेर सारा दबाव दिया गया बावजूद इसके उन्होंने बहादुरी से सामना किया लेकिन कभी झुके नहीं।सदैव निर्भीक बने रहे।श्रद्धांजलि देने वालों में सारण विभाग कार्यवाह डॉ प्रभात रंजन,डॉ मनोरंजन सिंह, सर्जन डॉक्टर डॉ अन्नू बाबू,बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रामशरण पांडेय, डॉक्टर आजाद आलम, लायंस क्लब सीवान के अध्यक्ष विकास सोमानी, भारत विकास परिषद् के अध्यक्ष श्री रोहित सिंह,सचिव श्री राजीव कुमार सिंह उर्फ़ श्रवण सिंह,कोषाध्यक्ष श्री अतुल श्रीवास्तव,कृष्ण चंद्र गाँधी मीडिया सेंटर,सिवान के सचिव श्री इंदल सिंह,विद्या भारती मीडिया सेवा (उत्तर पूर्व क्षेत्र ) के क्षेत्र प्रमुख श्री नवीन सिंह परमार,भारत विकास परिषद (संस्कार )के प्रांतीय संयोजक भारत भूषण पाण्डेय,समाजसेवी अनुग्रह भारद्वाज, डॉक्टर रोहित कुमार,नाजिया शादाब,अचला तिवारी, देवेंद्र गुप्ता, सत्यम सिंह सोनू, टिंकू सिंह, प्रिंस कुमार,पत्रकार अरविन्द पाठक,अमित कुमार मोनू,सचिन पर्वत सहित अन्य गणमान्य पस्थित रहे।

इस अवसर पर एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें डॉक्टर ऋचा सिंह, डॉक्टर रोहित कुमार ने अपनी सेवा प्रदान की और कुछ पैथोलॉजी जांच पर विशेष छूट की सुविधा आम मरीजों को प्रदान किया गया।
देश
पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 2026 का हुआ भव्य आयोजन
लोकतंत्र न्यूज,सिवान ;- भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 2026 के अंतर्गत रविवार को सिवान जिले के 105 विधानसभा क्षेत्र का महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम शहर के नूरावती मैरेज हॉल,फतेहपुर में भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिले भर से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और ऊर्जा का माहौल बना रहा।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा, इतिहास, संगठनात्मक संरचना, कार्यपद्धति एवं वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार इन विचारों के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाई जा सकती है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिवान भाजपा के जिलाध्यक्ष राहुल तिवारी ने कहा,“पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने का एक सशक्त अभियान है। इससे कार्यकर्ताओं को वैचारिक स्पष्टता मिलती है और वे पार्टी की नीतियों एवं योजनाओं को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाने में सक्षम बनते हैं। भाजपा का हर कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित है और इस प्रकार के प्रशिक्षण से उनकी कार्यक्षमता और भी निखरती है।”वहीं सिवान जिला के प्रभारी लालबाबू कुशवाहा ने अपने वक्तव्य में कहा,“भारतीय जनता पार्टी देश की एकमात्र ऐसी पार्टी है जो अपने कार्यकर्ताओं के सतत प्रशिक्षण और विकास पर विशेष ध्यान देती है। यह महाअभियान कार्यकर्ताओं को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करता है। संगठन की मजबूती ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है, और इसी के बल पर हम समाज के हर वर्ग तक अपनी बात पहुंचाने में सफल हो रहे हैं।”कार्यक्रम में सिवान भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रोफेसर अभिमन्यु कुमार सिंह ने भी विस्तार से अपने विचार रखते हुए कहा,“किसी भी संगठन की सफलता उसके सिद्धांतों, इतिहास और अनुशासन पर निर्भर करती है। भाजपा का गौरवशाली इतिहास और उसकी कार्यशैली कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है। हमें इन मूल्यों को आत्मसात करते हुए समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्य में पूरी निष्ठा से जुटना चाहिए।”इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने विभिन्न सत्रों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क, सोशल मीडिया की भूमिका तथा सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के तरीकों पर भी विस्तृत प्रशिक्षण दिया। कार्यकर्ताओं ने भी सक्रिय रूप से सहभागिता करते हुए अपनी जिज्ञासाएं रखीं और अनुभव साझा किए।कार्यक्रम के समापन पर सभी कार्यकर्ताओं ने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाने तथा आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन ने सिवान भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को और मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। कार्यक्रम मे मुख्य रूप से सिवान भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय पाण्डेय धनंजय सिंह मुकेश कुमार बंटी रंगबहादुर सिंह देवेंद्र गुप्ता पूनम गिरि किरण गुप्ता राजेश श्रीवास्तव प्रेम माझी अमित सिंह सोनू मुकेश कसेरा रूपल आनंद अजीत कुमार रंजना श्रीवास्तव सुनीता जैयसवाल प्रिन्स चौहान नीरज पटेल राजन साह सोनी स्वेब इत्यादि लोग मैजूद रहे।

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